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अब आया रोबोट चूहा
ब्रिटेन के वैज्ञानिकों ने एक ऐसे रोबोट चूहे का आविष्कार किया है, जिसके बारे में उनका दावा है कि यह अपनी मूँछों की बदौलत चीजों को पहचान सकेगा। इसके साथ ही इस तकनीक ने रोबोट के ऐसी जगहों पर भी काम करने का रास्ता खोल दिया है, जहाँ कुछ दिखाई नहीं देता।

ब्रिस्टल रोबोटिक्स लैबोरेटरी और यूनिवर्सिटी ऑफ शेफील्ड के एक दल ने जैविक रूप से प्रेरित आर्टीफिशियल इंटेलिजेंस प्रोजेक्ट के एक भाग के रूप में ‘स्क्रेचबोट’ रोबोट का निर्माण किया है।

वैज्ञानिकों के अनुसार रोबोट यह समझने में मदद करेगा कि मानव मस्तिष्क कैसे संवेदी तंत्र की गति को नियंत्रित करता है। छूकर पहचानने की यह तकनीक रोबोट को धुएँ से भरे कमरे में भी काम करने में सक्षम बनाएगी, जहाँ कुछ दिखाई नहीं देता।

नई तकनीकी रोबोट के भूमिगत स्थानों, समुद्र के अंदर और धूलभरे वातावरण में भी काम करने के रास्ते खोलेगी।

दल के सदस्य डॉ. टोनी पाइप ने कहा ‘‘लंबे समय से अधिकतर शोधों में दृष्टि को ही जैविक संवेदना के रूप में उपयोग किया जाता था, लेकिन छूने की तकनीक भी अहम है।’’

पाइप ने कहा ‘‘उदाहरण के लिए इसके जैसा रोबोट धुएँ से भरे कमरे में भी अग्निशमन कर्मचारियों को बचाव कार्यों में मदद कर सकता है।’’ वैज्ञानिकों के अनुसार चूहों में क्षतिग्रस्त मूँछों से भी काम करने की क्षमता होती है और उनके बनाए रोबोट की टूटी हुई मूँछों को भी बिना पूरे रोबोट को बदले आसानी से बदला जा सकता है।
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