नई वीजा प्रणाली के मुताबिक ब्रिटेन के स्कूलों में दाखिला पाने की चाह रखने वाले पाँच साल की उम्र के बच्चों से ये सवाल पूछे जाने पर कि क्या वे आतंकवादी हैं, यहाँ बवाल सा मच गया है। इससे हजारों विदेशियों को देश से निकाले जाने का खतरा भी पैदा हो गया है।
‘डेली टेलीग्राफ’ में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक, स्कूलों में दाखिला पाने की चाह रखने वाले बच्चों से ब्रिटेन में ये सवाल पूछे गए कि क्या वे आतंकवादी हैं या किसी युद्ध-अपराध या जनसंहार में शामिल रहे हैं। ये सवाल गृह मंत्रालय की ओर से पिछले महीने लागू किए गए नए नियम कायदों के बाद पूछे गए हैं ।
विदेशी छात्रों की ओर से भरे जाने वाले 57 पन्नों के दस्तावेज में पूछा गया है ‘क्या आवेदक कभी किसी माध्यम या किसी उद्देश्य से देश में किसी आतंकी वारदात में शामिल रहा, उसका समर्थन किया या उसे बढ़ावा दिया है?’
इस दस्तावेज में यह भी पूछा गया है ‘क्या आवेदक ने कभी किसी माध्यम या किसी उद्देश्य से किसी आतंकवादी वारदात को सही ठहराया है या किसी आतंकवादी हिंसा का महिमा-मंडन किया है या कोई ऐसा काम किया है जिससे किसी को आतंकवादी वारदात को अंजाम देने की प्रेरणा मिले?’
शिक्षाविदों ने चेतावनी दी है कि नए नियम से ब्रिटेन में पढ़ रहे करीब 20,000 विदेशी लोगों के देश से बाहर निकाले जाने का खतरा पैदा हो गया है।
उदारवादी डेमोक्रैट्स का कहना है कि ताजा विवाद से ब्रिटेन को उस स्थिति को नुकसान पहुँच सकता है जिसकी वजह से वह विदेशियों के लिए एक प्रमुख शिक्षा-केन्द्र के तौर पर मशहूर हैं। उदारवादी डेमोक्रैट्स के स्कूल प्रवक्ता ने कहा कि इस वीजा प्रणाली में कॉमन सेंस का अभाव है। |