कश्मीर मुद्दे पर मध्यस्थ की भूमिका निभाने से स्पष्ट इनकार करते हुए ओबामा प्रशासन ने कहा कि वह चाहता है कि भारत और पाकिस्तान समस्या का समाधान इस तरह करें कि दोनों पड़ोसी देशों के बीच तनाव कम हो। उसका मानना है कि क्षेत्रीय शांति को बढ़ावा देने के लिए यह महत्वपूर्ण है।
राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद् के प्रवक्ता माइक हैमर ने कहा,‘अमेरिका मध्यस्थ की भूमिका नहीं निभाएगा। हम चाहते हैं कि भारत और पाकिस्तान समस्या का इस तरह से समाधान करें कि तनाव में कमी आए क्योंकि हमारा मानना है कि यह दोनों देशों और क्षेत्रीय स्थिरता को बढ़ावा देने के हित में है।’
राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद, व्हाइट हाउस का अंतर एजेंसी समन्वय निकाय है। इसके प्रमुख जनरल जेम्स जोन्स हैं जिन्होंने हाल ही में भारत,पाकिस्तान और अफगानिस्तान की यात्रा की थी।
हैमर ने कहा कि जोन्स के हफ्ते भर के दौरे में भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव का मुद्दा उठा था लेकिन अमेरिका ने अपने रुख को दोहराया कि इसका उपाय नयी दिल्ली और इस्लामाबाद को ही करना है और अमेरिका की इसमें मध्यस्थ की भूमिका नहीं होगी।
जनरल जोंस के साथ उपस्थित हैमर ने कहा,‘भारत के प्रधानमंत्री और पाकिस्तान के राष्ट्रपति के बीच रूस में हुई वार्ता से हम उत्साहित हैं और उम्मीद है कि दोनों देश प्रयास को जारी रखेंगे ।’
पाकिस्तान और अफगानिस्तान की शांति और स्थिरता में भारत और अमेरिका के साझा हितों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि कश्मीर सहित कुछ विशेष मुद्दे भारत और पाकिस्तान के बीच द्विपक्षीय हैं।
उन्होंने कहा,‘कश्मीर पर मैं पहले भी कह चुका हूँ कि हम मध्यस्थ की भूमिका नहीं निभाने जा रहे हैं। हैमर ने कहा कि कश्मीर में आतंकवाद के संबंध में मैं आपको आश्वस्त कर सकता हूँ कि इस पर भारत और पाकिस्तान दोनों जगहों पर चर्चा हुई। हमें महसूस हुआ कि भारत और पाकिस्तान आतंकवाद से लड़ने को प्रतिबद्ध हैं और हम आश्वस्त होना चाहते हैं कि मुंबई जैसा हमला फिर नहीं हो।’
प्रवक्ता ने कहा कि तनाव कम करने और दोनों देशों के बीच वार्ता के लिए अमेरिका किसी भी उपाय का स्वागत करेगा। |