अमेरिकी प्रतिनिधि सभा की अध्यक्ष नैंसी पिलोसी ने कहा है कि तिब्बत की समस्या का फिलहाल कोई हल नजर नहीं आ रहा है क्योंकि चीनी अधिकारियों ने दलाई लामा के साथ शांतिपूर्ण वार्ता की बात को खारिज कर दिया है।
पिलोसी ने विश्व शरणार्थी दिवस के मौके पर कहा कि चीन के दमन की वजह से हिमालय पर्वत के खतरनाक दर्रों को पार कर लगभग 70000 तिब्बती शरणार्थी भारत और नेपाल चले गए हैं और वहाँ रह रहे हैं।
उन्होंने कहा कि चीन के दलाई लामा के साथ एक शांतिपूर्ण वार्ता के प्रस्ताव को खारिज किए जाने के बाद फिलहाल इस मुद्दे का हल नहीं हो सकता।
पिलोसी ने कहा कि वे उन शरणार्थियों के संघर्ष और दशा को समझती हैं, जिसका पूरी दुनिया में उन्हें सामना करना पड़ता है।
उन्होंने बताया कि बर्मा में मानवीय स्थिति खराब बनी हुई है। यह अनुमान लगाया गया है कि वहाँ लगभग 5,40,000 लोग देश के अंदर ही विस्थापित हैं और 1,50,000 से अधिक लोग शरणार्थी हैं। |