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ऐसी दीवानगी देखी नहीं कहीं
अमेरिका के पहले अश्वेत राष्ट्रपति बराक ओबामा के शपथ ग्रहण समारोह के ऐतिहासिक पलों का गवाह बनने के लिए लगभग 20 लाख लोगों का हुजूम व्हाइट हाउस के इर्द-गिर्द इकट्ठा था। पिछले 70 सालों में सबसे भीषण आर्थिक दौर से गुजर रहे अमेरिकियों में उम्मीद की किरण पैदा करने वाले ओबामा के बदलाव की लहर पर सवार लाखों अमेरिकी देश के कोने-कोने से मंगलवार को यहाँ इस यादगार लम्हे का हिस्सा बनने से लिए खिंचे चले आए। क्या गोरे और क्या काले- इन सबके कदमों को कड़ाके की ठंड भी रोकने में नाकाम साबित हुई।

प्राप्त जानकारी के मुताबिक अश्वेतों में तो गजब का उत्साह देखने को मिला। इनके हुजूम को व्हाइट हाउस तक पहुँचने के लिए एक हजार से अधिक बसों का इंतजाम किया गया था और ठसाठस भरी बसों में ये लोग दूरदराज के इलाकों से 12 घंटे तक का सफर तय कर यहाँ पहुँचे। देश के इतिहास में पहली बार किसी अश्वेत को दुनिया के सबसे ताकतवर देश के राष्ट्रपति पद की शपथ लेते देखने के लिए ओबामा समर्थकों की भीड़ संसद भवन कैपिटॉल हिल के बाहर मंगलवार तड़के ही एकत्रित होने लगी थी। मानो सभी को इस बात का पूरा अहसास था कि दिन निकलने का इंतजार किया तो पैर रखने की भी जगह नहीं मिलेगी।

वाकई बर्फीली सर्द हवाओं की परवाह न करने वाले ओबामा समर्थकों का अनुमान सही साबित हुआ और दिन निकलने से पहले जो जहाँ जगह पा गया, वहीं खड़ा रहा। व्हाइट हाउस और संसद भवन के आसपास की सड़कों पर समूचा अमेरिका देखा जा सकता था। आखिर हो भी क्यों न पिछले एक दशक से दो युद्ध और अब भीषण आर्थिक मंदी की विभीषिका से जूझ रहे अमेरिका को उबारने के आत्मविश्वास से लबरेज 47 साल के ओबामा की शपथ लेने की रस्म जो थी। क्या आम और क्या खास, हर कोई केन्याई अश्वेत पिता और अमेरिकी श्वेत माँ के इस लाल को शपथ लेते देखने को बेताब था। कुछेक की भावनाओं का ज्वार तो ऐसे उमड़ा कि आँखों से आँसू भी छलक आए।
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