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अमेरिका के समक्ष गंभीर चुनौतियाँ-ओबामा
राष्ट्रपति के रूप में बराक ओबामा का पहला संबोधन
दुनिया के सबसे शक्तिशाली देश अमेरिका के पहले अश्वेत राष्ट्रपति बने बराक हुसैन ओबामा ने मंगलवार को कहा कि हम संकट के दौर में हैं। देश के सामने गंभीर चुनौतियाँ हैं।

अमेरिका के 44वें राष्‍ट्रपति के रूप में शपथ ग्रहण करने के बाद समारोह स्थल पर मौजूद लाखों लोगों को संबोधित करते हुए ओबामा ने कहा कि देश और दुनिया के सामने हिंसा और आर्थिक मंदी बड़े मुद्‍दे हैं, लेकिन हमने उम्मीद का दामन नहीं छोड़ा है।

हम सबके दोस्त हैं : पूर्ववर्ती बुश की अपेक्षा अपने रुख में नरमी बरतते हुए नवनिर्वाचित राष्ट्रपति ने कहा कि अमेरिका दुनिया के प्रत्येक देश का दोस्त है। अफगानिस्तान में अमेरिकी मुहिम को आगे बढ़ाने का संकेत देते हुए ओबामा ने कहा कि हम वहाँ शांति स्थापित करने की कोशिश करेंगे। निर्दोष लोगों को मारने वालों को हम हराएँगे। विश्व शांति के लिए अमेरिका अपना योगदान देता रहेगा।

वास्तविक चुनौतियाँ : ओबामा ने कहा कि मैं आपसे कहता हूँ कि जिन चुनौतियों का हम सामना कर रहे हैं, वे वास्तविक हैं, वे गंभीर हैं। आसानी या थोड़े समय में उनका मुकाबला नहीं किया जा सकता, लेकिन उनका सामना किया जाएगा। उन्होंने कहा कि अपने गौरवशाली अतीत को याद कर इन चुनौतियों से लड़ना हैं। हमने पीढ़ियों तक संघर्ष किया है। उन्होंने कहा कि हमें नया अमेरिका बनाना है।

आर्थिक संकट : पिछली सदी की महामंदी के बाद अमेरिका के सबसे खराब आर्थिक संकट के दौर से गुजरने के बीच ओबामा ने अर्थव्यवस्था में नवजीवन के संचार के लिए निर्भीक और त्वरित कार्रवाई की वकालत की।

ओबामा ने वादा किया अर्थव्यवस्था की स्थिति कार्रवाई की माँग करती है, निर्भीक और त्वरित और हम कार्रवाई करेंगे। न सिर्फ नए रोजगार पैदा करने में बल्कि विकास की नई आधारशिला रखने में। ओबामा ने अमेरिकी अर्थव्यवस्था को पुनर्जीवित करने के लिए वृहद पैकेज का वादा किया है। योजना के तहत अमेरिका में तीस से चालीस लाख रोजगार सृजित करने का प्रस्ताव है। उन्होंने कहा कि हम सड़कें, पुल, बिजली के ग्रिड और डिजिटल लाइनें बनाएँगे, जो हमारे वाणिज्य का पोषण करें और हमें एकजुट रखें।

हिन्दुओं का बढ़ता प्रभाव : अमेरिका में हिन्दुओं के बढ़ते प्रभाव को उस समय मान्यता मिली जब ओबामा ने कहा कि अमेरिका अब ईसाइयों, मुसलमानों, यहूदियों और हिन्दुओं का देश है।

अमेरिकियों से जिम्मेदारी के नए युग का सूत्रपात करने का आग्रह करते हुए ओबामा ने अपने भाषण में कहा कि हम जानते हैं कि हमारी विविधताओं भरी विरासत हमारी ताकत है न कि कमजोरी। हम ईसाइयों और मुसलमानों, यहूदियों और हिन्दुओं तथा अनीश्वरवादियों का देश हैं।

मुसलमानों तक पहुँचे ओबामा : विश्व के लोगों विशेष तौर पर मुस्लिम दुनिया की निगाह उन पर लगी होने की बात को ध्यान में रखते हुए ओबामा ने अपने पहले भाषण में इस्लामी देशों की अवाम तक पहुँचने की कोशिश की।

ओबामा ने कहा दुनिया के वे नेता जो संघर्ष का बीज रोपना चाहते हैं या अपने समाज की बुराइयों का दोषारोपण पश्चिम पर करते हैं, आप जानते हैं कि आपकी जनता आपका आकलन इस पर करेगी कि आप क्या बना सकते हैं न कि आप क्या नष्ट कर सकते हैं।

तीसरी दुनिया विशेष तौर पर अफ्रीका की जनता को संबोधित करते हुए ओबामा ने कहा गरीब देशों की जनता के साथ हम मिलकर काम करना चाहते हैं ताकि आपके खेतों को सम्पन्न बना सकें और स्वच्छ जल प्रवाहित कर सकें, भूखे शरीर का पोषण कर सकें और भूखे दिमाग को भोजन दे सकें।

ओबामा के भाषण के मुख्य बिंद
*हम शांति और सम्मान के साथ रहना चाहते हैं
*हमने पीढ़ियों तक संघर्ष किया है
*अर्थव्यवस्था को मजबूत करना है
*सभी ने मिलकर देश को महान बनाया
*हमारा देश संकट के दौर में है
*अमेरिका के सामने गंभीर संकट
*सरकारी कर्मचारी को ईमानदार होना पड़ेगा
*अमेरिका हर देश का दोस्त है
*हमें नया अमेरिका बनाना है
*पूरे देश के लिए एकजुट होने के समय
*इराक पर फैसला वहीं के लोग करेंगे
*अफगानिस्तान में शांति की कोशिश करेंगे
*निर्दोषों को मारने वालों को हम हराएँगे
*विश्व शांति में अहम योगदान देते रहेंगे
*बिना निगरानी के कारण बाजार हाथ से निकला
*शांति का नया युग लाएगा अमेरिका
*आज से एक नए अमेरिका की शुरुआत करेंगे
*नफरत फैलाने वालों के लिए अमेरिका में जगह नहीं
*देश और दुनिया के प्रति हम सबकी जवाबदेही है
*शहीद सैनिकों को श्रद्धांजलि दी
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