अमेरिकी कांग्रेस के उच्च शक्ति संपन्न द्विदलीय आयोग ने कहा है कि सुरक्षा को लेकर विश्व में सबसे कमजोर कड़ी पाकिस्तान है अमेरिका पर अगले आतंकवादी हमले का स्रोत भी उसी देश में होगा तथा परमाणु हथियारों और आतंकवाद के सभी रास्ते पाकिस्तान में जाकर ही मिलते हैं।
'वर्ल्ड एट रिस्क' रिपोर्ट में एक पूरा अध्याय इस इस्लामी राष्ट्र पर केंद्रित है, जो कहता है अगर आज आतंकवाद और जनसंहार के हथियारों का नक्शा तैयार किया जाए तो सारे रास्ते पाकिस्तान में ही जाकर मिलेंगे।
रिपोर्ट कहती है हालाँकि पाकिस्तान अमेरिका का सहयोगी है पर इस बात का गंभीर खतरा भी है कि वह जनसंहार के हथियारों की संभावना के साथ अमेरिका में आतंकवादी हमले का एक परोक्ष स्रोत भी बन सकता है।
क्लिंटन प्रशासन में पूर्व वरिष्ठ अधिकारी वेंडी शेरमैन सहित अमेरिका के पूर्व सीनेटर बॉब ग्रेहम की अध्यक्षता में यह आयोग बना था। अब इसकी अध्यक्षता पदभार ग्रहण करने जा रहे ओबामा प्रशासन के सत्ता हस्तांतरण दल के विदेश नीति समूह के पास है। ग्रेहम ने सीएनएन टेलीविजन से बातचीत में पाकिस्तान को उग्र वातावरण का केंद्र बताया।
रिपोर्ट कहती है कि पाकिस्तान सबसे ज्यादा घातक वातावरण वाले केंद्र के रूप में उभर सकता है। पाकिस्तान के पास परमाणु हथियार हैं, वहाँ अस्थिर सरकारों का इतिहास है और उसके क्षेत्र के हिस्से वर्तमान में अलकायदा और अन्य आतंकवादियों के लिए पनाहगाह बने हुए हैं।
अमेरिकी कांग्रेस के आयोग की रिपोर्ट तैयार करने वालों का कहना है कि विशेष ध्यान देने के लिए उन्होंने पाकिस्तान को चुना क्योंकि उनका मानना है कि वह अमेरिका के अल्पकालिक और मध्यकालिक राष्ट्रीय सुरक्षा हितों के समक्ष गंभीर चुनौती खड़ी कर रहा है। यहाँ तक कि कई सरकारी अधिकारी और बाहरी विशेषज्ञ मानते हैं कि अमेरिका पर होने वाले अगले आतंकवादी हमले का स्रोत पाकिस्तान के संघ प्रशासित कबीलाई क्षेत्रों में होने की संभावना है।
आयोग ने आगाह किया इसके साथ ही पाकिस्तान के भारत के साथ तनावपूर्ण रिश्तों में उसका परमाणु हथियारों को बढ़ाना दक्षिण एशिया में खतरनाक हथियारों की होड़ बढ़ने की संभावना पेश कर रहा है, जो परमाणु संघर्ष में तब्दील हो सकती है।
भारत और ईरान जैसे देशों में परमाणु प्रौद्योगिकी का तेजी से फैलना मुख्य खतरों के रूप में देखा जा रहा है और पाकिस्तान ऐसे देशों में सबसे ज्यादा खतरनाक है।
आयोग ने कहा कि आतंकवादियों के किसी बड़े शहर पर जल्द ही परमाणु या जैविक हथियारों से हमला करने की संभावना अब पहले से कहीं ज्यादा है। इसमें पाकिस्तान की उसके आतंकवादी तंत्र और परमाणु हथियारों के कारण गहन चिंता के क्षेत्र के रूप में पहचान की गई है।
रिपोर्ट कहती है कि प्रसार और आतंकवाद रोकने के लिए पाकिस्तान को अगले अमेरिकी राष्ट्रपति और कांग्रेस के लिए शीर्ष प्राथमिकता सूची बनानी चाहिए।
अमेरिकी आयोग ने कहा कि अगले अमेरिकी राष्ट्रपति और कांग्रेस को पाकिस्तान के लिए समग्र नीति लागू करनी चाहिए, जो उसके और अन्य देशों के साथ मिलकर सैन्य कार्रवाई और आर्थिक तथा लोकतांत्रिक तरीकों के जरिये आतंकवादियों की पनाहगाहों को खत्म करने का काम करे और पाकिस्तान में जैविक तथा परमाणु सामग्री की सुरक्षा करे।
आयोग के अनुसार चरमपंथियों की विचारधारा का मुकाबला करना चाहिए उसे शिकस्त देनी चाहिए और एशिया में हथियारों की होड़ को रोका जाना चाहिए।
रिपोर्ट में आगाह किया गया है कि जैविक या परमाणु हमला पाँच वर्ष के अंदर होने की संभावना है। इस खतरे पर ध्यान देने के लिए वैश्विक निर्णायक कार्रवाई का आह्वान किया गया है।
अमेरिकी आयोग के अनुसार अत्यावश्यक कार्रवाई के बिना इसकी संभावना ज्यादा रहेगी कि वर्ष 2013 के अंत तक विश्व में कहीं आतंकवादी हमले के दौरान जनसंहार के हथियारों का इस्तेमाल हो। आयोग कहता है अमेरिका की सुरक्षा का दायरा सिकुड़ रहा है।
आयोग ने जनसंहार के हथियारों के प्रसार और आतंकवाद को रोकने के समक्ष खड़े खतरों के रूप में पाकिस्तान और ईरान जैसे देशों का नाम लिया है, जहाँ परमाणु प्रौद्योगिकी तेजी से फैल रही है। विश्व भर में जैविक रसायनों से जुड़े उद्योगों की कमजोर सुरक्षा भी एक खतरा है। |