भारत को फिलिस्तीनियों के लिए एक रोल मॉडल (अनुकरणीय) लोकतंत्र बताते हुए फिलिस्तीनी प्राधिकरण के राष्ट्रपति महमूद अब्बास ने कहा कि भारत पश्चिम एशिया शांति प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
अपनी भारत यात्रा पर रवाना होने से एक दिन पहले अब्बास ने कहा कि विश्व का दूसरा सबसे अधिक जनसंख्या वाला देश और उच्च प्रौद्योगिकी सहित तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था वाला भारत पश्चिम एशिया शांति प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर सकता है।
फिलिस्तीनी नेता ने कहा कि भारत के इसराइल सहित हमारे क्षेत्र के देशों के साथ विशेष रिश्ते हैं और यह शांति प्रक्रिया को आगे बढ़ाने में अच्छा योगदान दे सकता है।
भारत से शांति प्रक्रिया में सक्रिय योगदान की अपील करते हुए उन्होंने कहा कि हमारे क्षेत्र की सुरक्षा और स्थिरता उनके क्षेत्र की स्थिरता को सीधे प्रभावित करती है। इसे समझते हुए भारत ने इस क्षेत्र के लिए एक विशेष दूत नियुक्त किया है।
भारत के साथ अद्वितीय, ऐतिहासिक और मजबूत संबंधों की बात स्वीकार करते हुए अब्बास ने कहा कि फिलिस्तीनी लोग भारत को एक लोकतांत्रिक रोल मॉडल के रूप में देखते हैं और दोनों देशों के द्विपक्षीय रिश्ते नई दिल्ली में सत्ता में रहने वाली पार्टी पर निर्भर नहीं करते।
अब्बास ने कहा कि भारत उन कुछ देशों में शामिल है, जिनके साथ फिलिस्तीनी प्राधिकरण बनने की पूर्व संध्या पर कूटनीतिक रिश्ते स्थापित हुए थे। यहाँ यह भी उल्लेख करना प्रासंगिक होगा कि भारत ने ही सबसे पहले फिलिस्तीनी मुक्ति संगठन (पीएलओ) को मान्यता देते हुए अपने यहाँ प्रतिनिधि कार्यालय खोलने की अनुमति दी थी। भारत उन देशों में शामिल था जिसने पहले 1988 के फिलिस्तीनी राष्ट्र के घोषणा को मान्यता दी।
फिलिस्तीनी प्राधिकरण (पीए) को भारत की ओर से मिलने वाली एक करोड़ 50 लाख अमेरिकी डॉलर की सहायता के प्रति आभार जताते हुए राष्ट्रपति अब्बास ने कहा कि दोनों देशों के बीच मंत्रिस्तरीय संबंधों के प्रयास किए जाने चाहिए और फिलिस्तीनी अर्थव्यवस्था को बहाल करने के लिए भारत की औद्योगिक तकनीकी और उच्च तकनीकी विशेषज्ञता का उपयोग करना चाहिए।
अपनी भारत यात्रा के दौरान अब्बास अपने भारतीय समकक्ष प्रतिभा पाटिल, प्रधानमंत्री मनमोहनसिंह, उप-राष्ट्रपति हामिद अंसारी, संप्रग अध्यक्ष सोनिया गाँधी, विपक्ष के नेता लालकृष्ण आडवाणी सहित कई शीर्ष अधिकारियों से मुलाकात करेंगे। |