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एटमी परीक्षण का सीधे तौर पर उल्लेख नहीं
एनएसजी द्वारा भारत को अंतरराष्ट्रीय समुदाय के साथ परमाणु कारोबार के संबंध में दी गई ऐतिहासिक छूट में भारत की ओर से भविष्य में किए जाने वाले परमाणु परीक्षण का सीधे तौर पर कोई उल्लेख नहीं है, लेकिन इसमें विदेशमंत्री प्रणब मुखर्जी के उस वक्तव्य को शामिल किया गया है जिसमें उन्होंने परमाणु अप्रसार और निरस्त्रीकरण के प्रति भारत की वचनबद्धताओं को दोहराया है।

छूट संबंधी अंतिम दस्तावेज आर्म्स कंट्रोल एसोसिएशन की वेबसाइट पर उपलब्ध है। यह साफ करता है कि एनएसजी के सदस्य देश असैनिक परमाणु सहयोग पर नीतियों को बिना किसी राष्ट्रीय पूर्वाग्रह के लागू करेंगे।

छूट में भारत की ऊर्जा जरूरतों पर ध्यान दिया गया है। इसमें एनएसजी सदस्यों को ही जिम्मेदारी दी गई है कि वे हर पूर्ण सत्र में एक-दूसरे को सूचित करें कि उन्होंने भारत को क्या-क्या स्थानांतरित किया है।

एनएसजी अध्यक्ष देश अब एनएसजी दिशा-निर्देशों में परिवर्तन और इसके कार्यान्वयन के संबंध में भारत से विचार विमर्श करेगा। छूट संबंधी संशोधित मसौदे में एनएसजी अध्यक्ष देश से कहा गया है कि वह दिशा-निर्देशों में प्रस्तावित संशोधनों की समीक्षा करे।

छूट संबंधी अंतिम दस्तावेज में प्रस्तावित संशोधन को लेकर भारत से मंत्रणा करने को कहा गया है। वह भारत द्वारा उनके कारगर कार्यान्वयन को सुगम बनाएगा। मसौदे में प्रस्तावित संशोधन से संबंधित फैसले में भारत की भागीदारी का जिक्र है।

परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह (एनएसजी) ने तीन दिनों की मैराथन वार्ता के बाद भारत को अंतरराष्ट्रीय समुदाय के साथ परमाणु कारोबार की छूट दी।

अंतिम छूट में समूह के प्रमुख पर जिम्मेदारी दी गई है कि वह वैश्विक परमाणु व्यापार के संबंध में उसके दिशा-निर्देशों के पालन पर नियमित विचार विमर्श करे।

समूह के प्रमुख पर जिम्मेदारी है कि वह 45 सदस्यीय समूह को भारत द्वारा उसके दिशा-निर्देशों का किए जा रहे पालन के बारे में सूचित करे। दस्तावेज के अनुसार एनएसजी अध्यक्ष भारत के साथ इस नजरिए से विचार विमर्श करेगा ताकि उसके साथ बातचीत और सहयोग को तेज किया जा सके।

एक और शर्त कहती है कि अगर एक या एक से अधिक एनएसजी देश समझते हैं कि परिस्थितियाँ ऐसी बन गई हैं जिसके लिए विचार विमर्श करने की जरूरत है तो सदस्य देश बैठक करेंगे और समूह के दिशा-निर्देशों के अनुसार कार्रवाई करेंगे।
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