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मार्की ने एनएसजी को लताड़ा
डेमोक्रेटिक कांग्रेस के सदस्य एडवर्ड मार्की और एसीए ने भारत-अमेरिका असैनिक परमाणु करार का विरोध करते हुए एनएसजी के भारत को परमाणु वाणिज्य के लिए दी जाने वाली छूट प्रदान करने के लिए आड़े हाथों लिया है।

मार्की ने कहा कि बुश प्रशासन ने एनएसजी में छूट के लिए काफी प्रयास किया है, लेकिन इस मामले में कांग्रेस को अंतिम फैसला करना है।

उन्होंने कहा कि बुश प्रशासन अंतरराष्ट्रीय परमाणु कारोबार के संबंध में परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह से भारत को छूट दिलाने में सफल रही। लेकिन इस समझौते से वैश्विक परमाणु अप्रसार को करारा झटका लगा है और खतरनाक चलन का सूत्रपात हुआ है।

उन्होंने कहा कि एनएसजी से मिली छूट से पाकिस्तान, ईरान और उत्तर कोरिया जैसे देशों को क्या संदेश जाएगा, जहाँ हम अपने मित्र के लिए नियमों में ढील दे रहे हैं, लेकिन उन पर सख्त प्रतिबंध जारी है।

उधर आर्म्स कंट्रोल एसोसिएशन (एसीए) के कार्यकारी निदेशक डेरिल किम्बेल ने कहा कि यह निर्णय परमाणु अप्रसार के संदर्भ में ऐतिहासिक भूल है, जिसका नुकसान हमें आने वाले दशकों में देखने को मिलेगा।

उन्होंने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू बुश के दावों के बावजूद एनएसजी के नियमों तथा सुरक्षा मानकों से मिली छूट से भारत को परमाणु अप्रसार की मुख्यधारा में नहीं लाया जा सकता है।

किम्बेल ने कहा कि 179 देशों की तरह से भारत ने सीटीबीटी पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं। वह परमाणु साम्रगी और हथियारों के जखीरे को लगातार बढ़ा रहा है।
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