भारत को अपनी परमाणु महत्वाकांक्षाओं की पूर्ति में उस समय एक जबरदस्त सफलता हासिल हुई, जब परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह (एनएसजी) ने उसे महत्वपूर्ण छूट दे दी, जिससे 34 साल से चल रहा उसका परमाणु 'वनवास' समाप्त हो गया और परमाणु कारोबार का रास्ता खुल गया है।
पैंतालीस देशों के परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह ने सर्वसम्मति से भारत को परमाणु कारोबार की अभूतपूर्व छूट दी, जिसने परमाणु अप्रसार संधि (एनपीटी) और व्यापक परमाणु परीक्षण प्रतिबंध संधि (सीटीबीटी) पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं।
शुक्रवार को पाँच दौर की बातचीत में कोई सफलता नहीं मिलने के बाद आज समूह की फिर बैठक हुई, जिसमें ऑस्ट्रिया, आयरलैंड और न्यूजीलैंड की ओर से भारत को दी जाने वाली छूट को लेकर उठाई जा रही आपत्तियों को दूर कर लिया गया। इससे पहले शुक्रवार देर रात तक भारतीय और अमेरिकी अधिकारी करार पर आपत्ति करने वाले देशों को संतुष्ट करने का प्रयास करते रहे।
एनएसजी की अनिर्धारित बैठक के बाद ऑस्ट्रियाई विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता पीटर लांस्की ने कहा कि मैं विशेष तौर पर खुश हूँ कि भारत को छूट अंतरराष्ट्रीय परमाणु अप्रसार व्यवस्था को पूरा करती है। ऑयरलैंड, न्यूजीलैंड और स्विट्जरलैंड के साथ ऑस्ट्रिया ने भारत को दी जाने वाली छूट पर कड़ी आपत्ति जताई थी, जिसकी वजह से दो दिन की बातचीत में सर्वसम्मति नहीं बन पाने पर आज बिना पूर्व निर्धारित बैठक आयोजित की गई।
इन देशों के साथ सुर में सुर मिलाने वाले चीन ने आज छूट का विरोध नहीं किया, लेकिन विशिष्ट मुद्दों पर कुछ सवाल उठाए। सर्वसम्मति बन जाने पर चीन ने अपनी पूर्व स्थिति दोहराई।
आशंकित देशों की चिंताओं को दूर करने के लिए संशोधित मसौदे में कुछ बदलाव किए गए हैं, लेकिन इन परिवर्तनों का ब्योरा अब भी उपलब्ध नहीं है। पर्दे के पीछे चली जबरदस्त तौलमोल से भारत को कूटनीतिक विजय हासिल हुई, जिसमें अमेरिका ने देर रात तक अड़चन डालने वाले देशों से बातचीत में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
परमाणु अप्रसार और निरस्त्रीकरण के लक्ष्यों के प्रति प्रतिबद्धता जताने वाले विदेशमंत्री प्रणब मुखर्जी के कल के बयान और परमाणु परीक्षण पर स्वैच्छिक रोक के जिक्र से लगता है कि उन देशों को शांत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जिनका प्रसार को लेकर कड़ा दृष्टिकोण था।
चार देश शुरू में बयान से पूरी तरह संतुष्ट नहीं थे और अमेरिका प्रायोजित छूट के मसौदे में इस प्रतिबद्धता को शामिल कराना चाहते थे। वे परमाणु परीक्षण के बाद होने वाले दुष्परिणामों को भी इसमें शामिल कराना चाहते थे, लेकिन भारत ऐसी कोई शर्त शामिल करने के विरोध में था, जिसे वह महसूस करता है कि परमाणु परीक्षण करने का उसका संप्रभु अधिकार कमतर हो। भारत एनएसजी का सदस्य नहीं है, जो सर्वसम्मति के सिद्धांत पर फैसले करता है।
अमेरिका के हथियार नियंत्रण मामलों के कार्यकारी उपविदेश मंत्री जान रूड ने आज के निर्णय को ऐतिहासिक करार दिया। रूड ने एनएसजी में वॉशिंगटन के अभियान का संचालन किया। उन्होंने कहा यह अप्रसार व्यवस्था को मजबूत करने के लिए महत्वपूर्ण क्षण है।
यह पूछे जाने पर कि मुख्य तत्व क्या था, जिसने सफलता दिलाई-लांस्की ने कहा मुखर्जी के कल के बयान ने ऑस्ट्रिया और समान विचारधारा के सदस्यों की चिंताओं का शमन किया, जिससे उद्देश्य प्राप्ति में योगदान मिला।
ऑस्ट्रिया के लिए विशेष तौर पर भारत सरकार की 14 ऊर्जा संयंत्रों की पृथक्करण योजना में राहत है, जो संयुक्त राष्ट्र परमाणु निगरानी संगठन आईएईए के निरीक्षण के अधीन आएँगे। ऑस्ट्रिया ने एक बयान भी जारी किया, जिसमें कहा गया कि मुखर्जी के बयान के बाद इसने अपनी आपत्तियाँ वापस लीं, जो उसके अनुसार निर्णायक रहा। अमेरिकी अधिकारियों ने भी जोर दिया कि भारत को परमाणु प्रौद्योगिकी का हस्तांतरण इसके परमाणु कार्यक्रम को नजदीकी निगरानी में लाएगा और अंतरराष्ट्रीय अप्रसार प्रयासों को बल देगा।
रूड ने कहा एनएसजी भारत और बाकी दुनिया के साथ भारत के संबंधों के लिए यह ऐतिहासिक क्षण है। उन्होंने कहा मुखर्जी द्वारा कल जारी किए गए बहुत महत्वपूर्ण बयान ने बैठक के विचार-विमर्श में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। भारत की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने और स्वच्छ ऊर्जा की वैश्विक चुनौती से निबटने के लिए यह बहुत महत्वपूर्ण क्षण है।
रूड ने सकारात्मक तरीके से बातचीत की इच्छा के लिए एनएसजी सदस्यों की सराहना की। उन्होंने कहा देशों की विशेष चिंताएँ थीं, विशिष्ट ऐतिहासिक अनुभव था, लेकिन उन्होंने मुद्दे पर आवश्यक सकारात्मक और सहयोगात्मक रुख के साथ कदम बढ़ाया।
ब्रिटिश राजदूत साइमन स्मिथ ने कहा हम बहुत खुश हैं कि हम एक समझौते पर पहुँचने में सफल रहे, जिसमें हर कोई जी सकता है। अधिकारियों ने कहा अमेरिकी राष्ट्रपति बुश ने निजी तौर पर छूट के लिए सहयोगियों के साथ लामबंदी की। परमाणु करार के सफर पर नजर एनएसजी की छूट ऐतिहासिक-भारत भारत परीक्षण करने के लिए भारत स्वतंत्र छूट भारत से ज्यादा अमेरिका की जीत राष्ट्रपति ने प्रधानमंत्री को बधाई दी करार से खिलीं कांग्रेस की बाँछें केंद्र ने देश हित की कुर्बानी दी-भाजपा लालू ने दी मनमोहन को बधाई अब हम आगे बढ़ेंगे-मलफोर्ड भारत के परमाणु कार्यक्रम की हत्या-वाम केंद्र ने देश से धोखा किया-मायावती करार पर एनएसजी की मुहर बुश के पत्र पर अमेरिका ने दी सफाई
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