भारत को छूट देने के मामले में सहमति तैयार करने के लिए एनएसजी की बैठक में शुक्रवार को और प्रगति हुई, जबकि अमेरिका ने उद्देश्य हासिल करने के बारे में उम्मीद व्यक्त की है।
विदेशमंत्री प्रणव मुखर्जी द्वारा नई दिल्ली में जारी किए गए उस बयान से सही संकेत गए हैं कि भारत अप्रसार लक्ष्यों के लिए प्रतिबद्ध है। इस बयान से 45 सदस्यीय परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह में भारत का पक्ष मजबूत हुआ है तथा समूह के सदस्यों ने इसका स्वागत करते हुए इसकी सराहना की है।
बताते हैं कि कुछ देश अभी तक सवाल उठा रहे हैं। खासकर भारत द्वारा परमाणु परीक्षण से जुड़े मुद्दे पर। इन देशों ने एनएसजी बैठक के दूसरे दिन सुबह के सत्र में इन सवालों को उठाया। राजनयिकों ने कहा कि उनकी चिंताओं को दूर करने के प्रयास जारी हैं।
अमेरिका के हथियार नियंत्रण कार्यवाहक उपमंत्री जान रूड ने भोजनावकाश से पहले कहा हम इस बात से प्रसन्न हैं कि विचार-विमर्श में सकारात्मक प्रगति हुई है।
उन्होंने अप्रसार के संबंध में भारत की प्रतिबद्धता को व्यक्त करने वाले मुखर्जी के बयान को बेहद महत्वपूर्ण करार देते हुए कहा कि इस पर एनएसजी सदस्यों ने चर्चा की। एनएसजी सदस्यों ने इसकी सराहना करते हुए इसका स्वागत किया।
रूड ने कहा इसके आधार पर (भारत का बयान) हमारा मानना है कि विचार-विमर्श ने सकारात्मक गति पकड़ी। उन्होंने कहा कि अमेरिका भारत के लिए यह छूट हासिल करने को प्रतिबद्ध है तथा उसे उम्मीद है कि उद्देश्य को हासिल कर लिया जाएगा।
रूड ने कहा हम दोनों ही इस उद्देश्य को हासिल करने और सहमति तैयार करने के लिए प्रतिबद्ध हैं तथा हमें उम्मीद है कि मकसद हासिल कर लिया जाएगा। अप्रसार के बारे में दृढ़ विचार रखने वाले देशों की चिंताओं को शांत करने के लिए मुखर्जी द्वारा बयान जारी किए जाने के विचार पर कल रात इन देशों के प्रतिनिधियों के साथ विदेश सचिव शिवशंकर मेनन और प्रधानमंत्री के विशेष दूत श्याम सरन ने विचार-विमर्श किया।
भोजनवकाश के दौरान इन देशों के राजनयिकों ने अपनी सरकारों को मुखर्जी के बयान से अवगत कराया और उनकी प्रतिक्रिया जानी। मुखर्जी ने अपने बयान में यह भी कहा है कि भारत परमाणु परीक्षण पर स्वैच्छिक आधार पर लगाई गई रोक से बंधा हुआ है तथा वह संवर्द्धन एवं पुनः प्रसंस्करण स्थानांतरण सहित संवेदनशील प्रौद्योगिकियों के प्रसार का स्रोत नहीं बनेगा।
इसमें कहा गया कि भारत अप्रसार के साझा लक्ष्य को आगे बढ़ाने के लिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय के साथ काम करेगा। भारत को यह दावा इसलिए करना पड़ा, क्योंकि वियना में चल रही दो दिवसीय बैठक में छूट के मुद्दे पर 45 सदस्यीय एनएसजी के चार देश अभी तक अपनी आपत्तियों पर अड़े हुए हैं।
आपत्ति व्यक्त कर चुके देशों का मानना है कि भारत एनएसजी छूट का इस्तेमाल अपने सैन्य परमाणु कार्यक्रम के विस्तार के लिए कर सकता है। न्यूजीलैंड, ऑस्ट्रिया आयरलैंड और स्विटजरलैंड अमेरिका द्वारा पेश किए गए मसौदे में बदलाव की माँग की है। अमेरिका ने विशालतम लोकतंत्र और दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में से एक भारत को वैश्विक परमाणु मुख्यधारा में लाने के लिए इसे ऐतिहासिक अवसर करार दिया है।
परमाणु करार के कार्यान्वयन के लिए एनएसजी छूट एक महत्वपूर्ण कदम होगा। एनएसजी से हरी झंडी मिलने के बाद इसे अंतिम मंजूरी के लिए अमेरिकी कांग्रेस में पेश किया जाएगा।
आस्ट्रिया की आपत्ति बरकरार : ऑस्ट्रिया ने शुक्रवार को कहा कि भारत-अमेरिका परमाणु करार को हरी झंडी दिखने के मकसद से सहमति तैयार करने के लिए मसौदा छूट में कुछ और काम करने की जरूरत है, जबकि समूह के सदस्यों ने औपचारिक चर्चा के दो दौर के बाद अनौपचारिक विचार-विमर्श के लिए अवकाश लिया।
ऑस्ट्रिया चाहता है कि इस महत्वपूर्ण दस्तावेज में कुछ अनुषांगिक उपाय शामिल किए जाने चाहिए। बताया जाता है कि एक अन्य देश आयरलैंड अभी तक मसौदा के मौजूदा स्वरूप को लेकर आशंकित है। ऑस्ट्रिया के विदेश मंत्रालय के अधिकारी पीटर लाउंस्की ने कहा हमें अधिक प्रभावी और गुणात्मक रूप से बेहतर सुरक्षा ढाँचे की दरकार है।
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