बॉलीवुड के लटकों-झटकों के कारण यहाँ के फिल्म प्रेमियों में भारतीय फिल्मों के प्रति अच्छा उत्साह रहता है। ऐसा समझा जा रहा है कि पहले देखी गई फिल्मों की कई यादों के कारण इस बार चल रहे टोरंटो अंतरराष्ट्रीय फिल्मोत्सव (टिफ) में भी पहले जैसा ही माहौल होगा।
वर्ष 2006 में धूम-धड़ाके के साथ पेश की गई करण जौहर की कई फिल्म स्टारों वाली 'कभी अलविदा न कहना' दर्शकों को भारी संख्या में आकर्षित करने मे सफल साबित हुई थी।
इस अभियान से जुड़ी बेल लाइट बॉक्स कमेटी के सह-उपाध्यक्ष टेलर होल्ड यहाँ के राय थॉमसन हॉल में देखी गई अमिताभ, शाहरुख, अभिषेक जैसे फिल्मी स्टारों की मेगा फिल्म की याद को भुला नहीं पा रहे हैं।
तैंतीसवें टिफ समारोह के उद्घाटन के दिन होल्ड ने 'नेशनल पोस्ट' को कहा कि यूरोप में तीन सप्ताह की छुटि्टयों के दौरान मैंने 'कभी अलविदा न कहना' के गाने हर शहर में सुने थे।
ओगेल्वी रेना के वकील डब्ल्यू सोलीमन 'कभी अलविदा न कहना' के दीवाने हैं। वे कहते हैं कि फिल्मोत्सव में यह मेरी पहली बॉलीवुड फिल्म थी और सबसे प्रिय फिल्म है।
टिफ में हिंदी फिल्मों को लोकप्रिय बनाने का श्रेय इस फिल्मोत्सव से जुड़े कई भारतीय मूल के उद्यमियों को जाता है। बैंकर से एंजेल निवेशक बने अमित मोंगा और कार्गोइट कनाडा के मालिक अजय विरमानी भारतीय फिल्मों को टोरंटो लाने वालों में प्रमुख रहे हैं।
मोंगा लंबे समय से टिफ में आ रहे हैं और इस साल वह फिल्म उत्सव के लिए धन जुटाने के लिए कई कार्यक्रम भी कर रहे हैं। दीपा मेहता की 'वॉटर' और 'हॉलीवुड बॉलीवुड' का निर्माण करने वाले विरमानी अनीस बज्मी की इस साल की सबसे हिट फिल्म 'सिंह इज किंग' को प्रायोजित कर रहे हैं।
टिफ उत्तरी अमेरिका महाद्वीप का अग्रणी फिल्म उत्सव है और यहाँ पर 60 से भी अधिक देशों की 300 से अधिक फिल्मों का प्रदर्शन किया जाएगा। इस फिल्मोत्सव में 'सिंह इज किंग' और नंदिता दास की पहली निर्देशित फिल्म 'फिराक' सहित कई बॉलीवुड फिल्मों का प्रदर्शन किया जाएगा।
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