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अमेरिका का पाकिस्तान से भरोसा उठा
आतंकवाद के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय मुहिम में पाकिस्तान को अपना सबसे भरोसेमंद सहयोगी मानने वाले अमेरिका का यह भरोसा पाकिस्तान के राष्ट्रपति पद से मुशर्रफ की विदाई के साथ ही डगमगाने लगा है।

हालाँकि अमेरिका के राष्ट्रपति बुश ने आर्थिक, राजनीतिक और सुरक्षा मामलों की चुनौतियों से निपटने के लिए पाकिस्तान के साथ मिलकर काम करने के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है, लेकिन उनकी ही पार्टी के एक वरिष्ठ सीनेटर डंकन हंटर का यह बयान कि मुशर्रफ के इस्तीफे के साथ ही आतंकवाद के खिलाफ संघर्ष में पाकिस्तान की भागीदारी अब संदेहों के घेरे में आ गई है। यह साबित करता है कि दोनों मुल्कों के बीच वह दोस्ती शायद अब न दिखाई दे।

घरेलू राजनीति और आतंकवादी ताकतों के जबर्दस्त विरोध के बावजूद अमेरिका का साथ देने के कारण 'बुशर्रफ' का खिताब अर्जित करने वाले परवेज मुशर्रफ का जाना दोनों देशों के बीच की मजबूत कड़क्ष का शिथिल पड़ना है।

आंतरिक कलह से जूझ रही पाकिस्तान की मौजूदा कमजोर सरकार के बारे में डंकन का मानना है कि यह सरकार मुशर्रफ के समान अमेरिका के लिए संभवत: उतनी भरोसेमंद नहीं रह पाएगी।
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