राष्ट्रपति पद के चुनाव में डेमोक्रेटिक दल के उम्मीदवार बराक ओबामा ने प्रभावी विदेश नीति की जरूरत पर जोर देते हुए कहा कि जब तक अमेरिका जैसे समृद्ध देश जलवायु परिवर्तन के मुद्दे पर समान रूप से विचार नहीं करते, तब तक भारत जैसे देश विषय पर गंभीरतापूर्वक ध्यान नहीं देंगे।
पश्चिम एशिया और यूरोप की यात्रा के दौरान ओबामा ने कहा कि प्रभावी अमेरिकी विदेश नीति महज अपनी ताकत दिखाने पर नहीं बल्कि दूसरों की बात सुनने और आम सहमति बनाने की हमारी काबिलियत पर आधारित हो।
उन्होंने कहा कि ओबामा प्रशासन की विदेश नीति का उद्देश्य निश्चित रूप से अमेरिका की सुरक्षा और हितों के लिए काम करना होगा, लेकिन इसमें यह भी शामिल रहेगा कि हम हमारे सहयोगियों की बात ध्यान से सुनें ताकि वह यह जान सकें कि हम उनके हितों को समझते हैं।
हम उन तरीकों को भी तलाशेंगे जिससे साझा उद्देश्यों को पूरा करने के लिए साथ मिलकर काम किया जा सके। ओबामा से जलवायु परिवर्तन के बारे में पूछा गया था। इस पर उन्होंने कहा था कि विदेश नीति को केवल अमेरिकी सुरक्षा के नजरिए से नहीं देखा जा सकता।
ओबामा ने कहा कि अमेरिका एक मजबूत देश है, लेकिन जैसा मैंने पूर्व में भी कहा था कि जलवायु परिवर्तन का मुद्दा ऐसा नहीं है जिसे हम खुद ही सुलझा सकें। इसके लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रयास करने की जरूरत है।
ओबामा ने कहा कि हमें न सिर्फ यह देखना होगा कि फ्रांस और जर्मनी जैसे देश कार्बन उत्सर्जन की समस्या से निपटने और किफायती ऊर्जा के लिए क्या कदम उठा रहे हैं, बल्कि हमें भारत और चीन जैसे देशों से भी बातचीत करनी होगी।
उन्होंने कहा कि यूरोपीय सहयोगी हों, मुस्लिम देश हों या फिर एशियाई मित्र, हमें लोगों को यह महसूस कराना होगा कि अमेरिका उनके हितों और उनकी चिंताओं के बारे में सोच रहा है। हम आम आदमी की खुशहाली तथा शांति में दिलचस्पी रखते हैं और हम विदेश नीति को सिर्फ खुद की सुरक्षा के नजरिए से नहीं देखते।
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