रूस के राष्ट्रपति दमित्री मेदवेदेव ने प्रण लिया कि अगर अमेरिका मध्य यूरोप में मिसाइल सुरक्षा कवच स्थापित करने की विवादास्पद योजना आगे बढ़ाता है तो हम भी उसके मुकाबले में उपाय करेंगे।
मिसाइल का पता लगाने वाले रडार को स्थापित करने के लिए अमेरिका और चेक गणराज्य के बीच कल एक समझौते पर हुए हस्ताक्षर के संदर्भ में मेदवेदेव ने कहा कि हम इस स्थिति को लेकर काफी व्यथित हैं।
जापान में जी-8 समूह के सम्मेलन के बाद मेदवेदेव ने टेलीकॉन्फ्रेंसिंग के जरिए संवाददाता सम्मेलन में कहा कि मैं फिर दोहराता हूँ हम इससे संतुष्ट नहीं हैं और मैंने यही बात अपने समकक्षों से कही है। निश्चित तौर पर हम इस मुद्दे पर भावना और उन्माद में नहीं आएँगे, लेकिन प्रतिक्रिया स्वरूप हम दूसरे उपायों पर भी विचार करेंगे।
मेदवेदेव ने कहा कि चेक गणराज्य ने अमेरिका के साथ मिसाइल कवच संधि पर हस्ताक्षर कर रूस को हताश किया है, लेकिन उन्होंने आगामी वार्ता के लिए रूस की तैयारी भी जताई।
अमेरिकी विदेश मंत्री कोंडोलिजा राइस और चेक गणराज्य के विदेशमंत्री कारेल श्वार्जेनबर्ग ने कल पराग्वे में रडार करार पर हस्ताक्षर किए थे। इसमें रडार स्थापित करने की शर्तें शामिल हैं और इसे अभी भी चेक गणराज्य की संसद से मंजूरी की जरूरत है।
ईरान और उत्तर कोरिया के मिसाइल हमलों से अपने सहयोगी राष्ट्रों की हिफाजत करने को लेकर अमेरिका पोलैंड या लिथुआनिया में 10 मिसाइल को रोकने वाले उपकरण लगाने की योजना बना रहा है। इसे रूस खुद की सुरक्षा को लेकर खतरे के रूप में देखता है।
दुष्ट राष्ट्रों की ओर से संभावित हमलों को विफल करने के लिए मिसाइल सुरक्षा कवच की अमेरिकी दलील की प्रतिक्रिया स्वरूप रूस ने यूरोप और अमेरिकी नेतृत्व वाले नाटो के साथ संयुक्त मिसाइल सुरक्षा प्रणाली पर काम करने का प्रस्ताव रखा है। इसमें रूस की भी समान भूमिका रहेगी।
मेदवेदेव ने जापान में कहा कि इसके साथ ही मैं फिर कहना चाहूँगा कि हम आगामी वार्ता बंद नहीं करेंगे और इसे जारी रखेंगे। इसमें जी 8 के भागीदार और नाटो देश भी शामिल रहेंगे।
इससे पहले अमेरिका और चेक गणराज्य के बीच हुए रडार समझौते को लेकर प्रतिक्रिया देते हुए रूसी विदेशमंत्री ने एक वक्तव्य में कहा कि अमेरिकी योजना के जवाब के रूप में रूस उचित उपाय करने के लिए मजबूरत हो जाएगा।
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