भारत-अमेरिका असैन्य परमाणु करार को लेकर संकट का सामना कर रही संप्रग सरकार जहाँ अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रही है, वहीं प्रधानमंत्री मनमोहनसिंह ने बुधवार को अमेरिकी राष्ट्रपति जार्ज बुश से करार पर हुई प्रगति की चर्चा की। बुश ने देश को दिए नेतृत्व के लिए सिंह की सराहना की।
वामदलों द्वारा संप्रग सरकार से औपचारिक रूप से समर्थन वापस लेने से कुछ घंटों पूर्व बुश ने 50 मिनट की विस्तारित बैठक में कहा यह वास्तव में दो दोस्तों में अच्छी बैठक थी। प्रधानमंत्रीजी आज हमारे साथ वक्त बिताने के लिए आपको धन्यवाद और देश में आपके नेतृत्व के लिए आपको बधाई!
जापान के होकाइदो द्वीपसमूह में हो रही समूह आठ के आयोजन स्थल में ठहरे बुश से भेंट करने के लिए मनमोहनसिंह सापोरो से एक सौ किलोमीटर का सफर तय कर सुरम्य वादियों में स्थित अमेरिकी राष्ट्रपति के होटल विंडसर पहुँचे। दोनों नेताओं ने बातचीत के दौरान द्विपक्षीय सामरिक संबंध मजबूत करने पर बल दिया।
दोनों नेताओं के हाव-भाव, गर्मजोशी से हाथ मिलाना और एक-दूसरे के लिए तारीफ के पुल बाँधना इस बात की गवाही दे रहे थे कि वे परमाणु करार को तेजी से आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
बुश ने जुलाई 2005 में दोनों नेताओं में असैन्य परमाणु करार को लेकर हुई सहमति के संदर्भ में स्पष्ट रूप से केवल इतना ही कहा कि हमने परमाणु करार के बारे में बातचीत की, यह हम दोनों देशों के लिए कितना महत्वपूर्ण है।
बुश ने इस बैठक को दो दोस्तों में बातचीत की संज्ञा देते हुए कहा कि मैं प्रधानमंत्री का बहुत सम्मान करता हूँ। मैं भारत का भी बहुत सम्मान करता हूँ। मुझे लगता है कि यह बहुत जरूरी है कि अमेरिका नई सामरिक भागीदारी तैयार करने के लिए अपने मित्रों के साथ मिलकर काम करे और ऐसे संबंध कायम करे, जो विश्व की कुछ समस्याओं को हल कर सके।
बुश के साथ संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में मनमोहनसिंह ने परमाणु रक्षा अंतरिक्ष और शिक्षा सहित विभिन्न क्षेत्रों में दोनों देशों के बीच हुई प्रगति की जानकारी दी।
अमेरिकी राष्ट्रपति की तारीफ का जवाब देते हुए सिंह ने दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों में बुश के उल्लेखनीय योगदान की सराहना की और कहा कि जुलाई 2005 में हुई उनकी पहली बैठक के बाद से सभी क्षेत्रों में बेहतरीन प्रगति हुई है।
उन्होंने कहा हमारे संबंध पहले कभी इतने अच्छे नहीं रहे, जितने आज हैं। यह हमारी सरकार का लक्ष्य है और जैसा कि मुझे लगता है यह भारत की जनता की भी खासकर विचारशील जनता की इच्छा है कि परस्पर आत्मनिर्भरता के इस विश्व में चाहे, वह जलवायु परिवर्तन की बात हो या विश्व अर्थव्यवस्था के प्रबंधन की बात हो, भारत और अमेरिका को कंधे से कंधा मिलाकर काम करना चाहिए और वही होने जा रहा है।
सिंह ने कहा दोनों देश विश्व व्यापार संगठन की दोहा दौर की वार्ता की सफलता के लिए विभिन्न बहुपक्षीय संस्थाओं में मिलकर काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा मैं अपने संबंधों की स्थिति से बहुत खुश हूँ। हमारे संबंधों ने सच्चे अर्थों में सामरिक भागीदारी का स्वरूप हासिल कर लिया है।
दोनों नेताओं ने हालाँकि किसी सवाल का जवाब नहीं दिया। बुश ने कहा दोनों नेताओं ने विचार किया कि उनके देश एक-दूसरे की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए किस तरह मिलकर काम कर सकते हैं और साथ ही पर्यावरण के प्रति भी जिम्मेदार बने रह सकते हैं।
बुश ने कहा समस्याएँ सुलझाने के लिए अमेरिका भारत के साथ दोस्तों की तरह काम करना चाहता है। दोनों देशों को मित्रवत काम करते रहना चाहिए।
उन्होंने बताया कि दोनों नेताओं ने पर्यावरण मुक्त व्यापार तथा दोहा दौर की वार्ताओं पर बातचीत की। उन्होंने कहा हमने इस बात पर विचार-विमर्श किया कि भारत और अमेरिका के लिए एक साझा धरातल तलाश करना कितना महत्वपूर्ण है, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि संरक्षणवादी भावनाएँ एक दीवार की तरह न बढ़ें।
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