अमेरिका के एक पूर्व शीर्ष अधिकारी ने कहा है कि भले ही जॉन मैक्केन या बराक ओबामा अभी परमाणु करार की हिमायत कर रहे हों लेकिन राष्ट्रपति पद पर आसीन होने के बाद परमाणु करार को समग्र परमाणु परीक्षण प्रतिबंध संधि के अनुमोदन से जोड़ सकते हैं।
वर्ष 1998-2000 में अमेरिका-भारत वार्ता पर तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति बिल क्लिंटन के विशेष दूत रह चुके स्ट्राब टालबोट ने कहा कि दोनों (मैक्केन और ओबामा) ने बुश-सिंह करार का समर्थन किया है। बहरहाल यह अस्पष्ट है कि राष्ट्रपति के रूप में दोनों में से कोई सीधे-सादे करार का अनुमोदन कर देगा और उसके मौजूदा रूप में कार्यान्वित कर देगा।
पूर्व विदेश उपमंत्री टालबोट ने कहा कि राष्ट्रपति पद के चुनाव का विजेता किसी रूप में करार के पूर्ण कार्यान्वयन को समग्र परमाणु परीक्षण प्रतिबंध संधि की भारतीय स्वीकृति से जोड़ सकता है, जिसे बुश प्रशासन ने दृढ़ता से विरोध किया था।
उन्होंने भारत और अमेरिका के बीच के रिश्तों की खुशनुमा तस्वीर पेश करते हुए कि यह नई बुलंदी पर जा रहा है। पूर्व अमेरिकी विदेश उपमंत्री ने कहा कि परमाणु करार बहुत गंभीर स्थिति में है और अमेरिकी अधिकारियों को करार के प्रति संदेह है।
टालबोट ने कहा उन्हें (अमेरिकी अधिकारियों को) अंदेशा है कि करार भारत की आंतरिक राजनीति के गंभीर रूप से घायल हुआ है। अगले साल जब अमेरिकी पक्ष में नया नेता होगा और संभवत: भारतीय पक्ष में भी नया नेता होगा।
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