वैज्ञानिकों ने हाल में मिले आँकड़ों के आधार पर घोषणा की है कि बुध ग्रह की सतह का आकार वहाँ सक्रिय ज्वालामुखी तय करते हैं और इस ग्रह का चुंबकीय क्षेत्र पिघली हुई सतह से बनता है। समय के साथ धीरे-धीरे कम होती ग्रह की सतह अब बेहद तेज रफ्तार से सिकुड़ती जा रही है।
अंतरिक्ष एजेंसी नासा के मैसेंजर अंतरिक्ष यान से मिले आँकड़ों के आधार पर वैज्ञानिकों ने यह घोषणा की है। इससे पहले ऐसा माना जाता था कि बुध ग्रह की सतह का आकार बाहरी तत्व तय करते हैं, लेकिन इस ग्रह के नजदीक से गुजरे अंतरिक्ष यान से मिले ताजा आँकड़ों के आधार पर वैज्ञानिकों ने कहा है कि यह आकार वहाँ मौजूद सक्रिय ज्वालामुखी तय करते हैं।
पृथ्वी से 770 लाख किलोमीटर दूर स्थित सूर्य के ताप में तपते इस ग्रह की सतह के रासायनिक संगठन के बारे में भी पहली बार वैज्ञानिकों को जानकारी मिली है।
अंतरिक्ष यान मैसेंजर ने बुध ग्रह के पतले वातावरण की संरचना की जाँच की ग्रह के निकट आवेशयुक्त कणों या आयनों के नमूने लिए और प्रेक्षण तथा ग्रह की सतह पर मौजूद पदार्थों के बारे में नए संबंधों का प्रदर्शन किया।
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