पानी के अंदर से चुपचाप प्रहार करने वाले उपकरण के साथ अपनी नौसैनिक क्षमता को बढ़ाने के लिए 17 साल के अंतराल के बाद भारत को रूस से अकुला श्रेणी की पहली परमाणु पनडुब्बी अगले वर्ष मिलेगी।
रूस के रक्षा सूत्रों के अनुसार इस बहुउपयोगी परमाणु पनडुब्बी का परीक्षण 11 जून को कोम्सोमोल्स्क आन अमूर में शुरू हो चुका है। इसके बाद समुद्र में भी इसके परीक्षण होंगे। इसका नाम 'आईएनएस चक्र' रखा जाएगा और भारत को यह 10 वर्ष की लीज पर दी जाएगी। सितंबर 2009 में भारत को यह पनडुब्बी मिलेगी।
विशेषज्ञों के अनुसार चक्र से भारतीय नौसेना के बेड़े में उस रिक्तता को भरा जा सकेगा, जो अधुनातन स्वदेशी प्रौद्योगिकी युद्धपोत 'एटीवी' परियोजना में विलंब के कारण उत्पन्न हुई है। यह परियोजना परमाणु क्षमता से युक्त हमला करने में समक्ष मिसाइल वाली पनडुब्बियों के निर्माण से जुड़ी है।
सेंट पीट्सबर्ग के समीप सोसनोवी बोर प्रशिक्षण केंद्र में भारतीय नौसेना के चालक दल के तीन सदस्यों को इस परमाणु पनडुब्बी के लिए पहले ही प्रशिक्षित किया जा चुका है।
सूत्रों के मुताबिक गोर्शकोव के पैकेज के एक हिस्से के तौर पर भारत ने वर्ष 2004 में हुए 65 करोड़ अमेरिकी डॉलर के समझौते के तहत शचुका बी नाटो का नाम अकुला की परियोजना 971 को पूरा करने के लिए वित्तीय मदद की है।
अकुला हमला करने में सक्षम रूस की पनडुब्बी है। 1988 में एक पनडुब्बी भारतीय नौसेना को दी गई थी।
गोर्बाचेव पर था अमेरिकी दबाव : जनवरी 1988 में तब के सोवियत संघ ने भारत को परियोजना 670 'नाटो का नाम चार्ली' के तहत के 43 परमाणु पनडुब्बी लीज पर दी थी। यह बतौर आईएनएस चक्र मार्च 1991 तक भारत के साथ थी। सोवियत रूस के राष्ट्रपति मिखाइल गोर्बाचेव पर अमेरिका द्वारा दबाव बनाए जाने के बाद इस पनडुब्बी की लीज को बढ़ाने से रूस ने इनकार कर दिया था।
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