भारत ने कहा कि ईरान के खिलाफ एकतरफा सैन्य कार्रवाई को मंजूरी नहीं दी जा सकती और यह अवांछनीय है। इसे अंतरराष्ट्रीय समुदाय द्वारा भी नामंजूर किया जाना चाहिए।
विदेशमंत्री प्रणब मुखर्जी ने मिस्र के विदेशमंत्री अहमद अबुल घेट के साथ कल रात यहाँ बातचीत के बाद कहा कि ईरान के संदर्भ में मैं मिस्र के विदेशमंत्री से पूरी तरह सहमत हूँ कि किसी तरह की सैन्य कार्रवाई नहीं होनी चाहिए।
घेट के साथ संयुक्त प्रेस वार्ता में उन्होंने कहा कि मुद्दों को वार्ता के माध्यम से सुलझाना चाहिए। संयुक्त राष्ट्र के सदस्य देश और एक संप्रभु राष्ट्र पर एकतरफा सैन्य कार्रवाई पूरी तरह नामंजूर एवं अवांछनीय है और किसी को भी इसमें शामिल नहीं होना चाहिए। यह अंतरराष्ट्रीय समुदाय को भी नामंजूर होना चाहिए।
भारत ने परोक्ष रूप से फिलिस्तीन में इसराइल की आक्रामक कार्रवाई की भी निंदा की और कहा कि दोनों देशों को अपनी सीमा में शांति से रहना चाहिए।
तीन दिनों की मिस्र यात्रा पर आए मुखर्जी ने कहा कि भारत न तो इसराइल और न ही िफलिस्तीन की कार्रवाई का समर्थन करता है। उन्होंने कहा कि किसी को न तो आक्रामक कार्रवाई की शुरुआत करनी चाहिए और न ही किसी को उसका सशस्त्र ढंग से जवाब देना चाहिए।
यह बात इसराइल और िफलिस्तीन दोनों पर समान रूप से लागू होती है, क्योंकि आमतौर पर इसराइल सशस्त्र पहल करता है और फिलिस्तीन उसी ढंग से उसका जवाब देता है।
उन्होंने कहा कि भारत टिकाऊ शांति चाहता है और दोनों देशों को अपनी सीमाओं में शांति के साथ रहना चाहिए।
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