विदेशमंत्री प्रणव मुखर्जी भारत और मिस्र के परंपरागत मैत्रीपूर्ण संबंधों को विस्तार देने तथा पश्चिम एशिया के घटनाक्रम पर विचार-विमर्श करने के लिए तीन दिन की यात्रा पर काहिरा रवाना हो गए।
पश्चिम एशिया में इसराइल और सीरिया तथा इसराइल और फिलस्तीन के बीच चल रही शांति वार्ताओं का भारत ने समर्थन किया है तथा वे इस क्षेत्र के देश विवादों को सुलझाने में भारत से सक्रिय भूमिका निभाने का आग्रह करते रहे हैं।
हाल ही में भारत यात्रा पर आए सीरिया के राष्ट्रपति बरार अल अमद ने भारत से अपने प्रभाव का इस्तेमाल करने का अनुरोध किया था। मुखर्जी की यात्रा भारत और मिस्र के बीच बढ़ते व्यापार संबंधों के परिप्रेक्ष्य में भी महत्वपूर्ण है।
पिछले सात वर्ष में भारत के किसी विदेश मंत्री की इस पहली मिस्र यात्रा के दौरान मुखर्जी वहाँ के विदेश मंत्री अहमद अबुल गेइत के साथ पश्चिम एशिया समेत विभिन्न अंतरराष्ट्रीय मुद्दों और द्विपक्षीय संबंधों पर चर्चा करेंगे। उल्लेखनीय है कि इसराइल और हमास के बीच हाल में हुआ युद्धविराम मिस्र की मध्यस्थता का ही परिणाम था।
विदेश मंत्रालय की विज्ञप्ति के अनुसार भारत और मिस्र के बीच आर्थिक एवं वाणिज्यिक सहयोग हाल के वर्षों में बढ़ा है। मिस्र में भारतीय निवेश 75 करोड़ से बढ़कर 2010 तक दो अरब डॉलर हो जाने की आशा है।
विश्व के अनेक देशों के राजनेता अगले साल जुलाई में मिस्र में जुटेंगे, जब वहाँ 15वाँ गुटनिरपेक्ष शिखर सम्मेलन आयोजित होगा।
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