यूरोप में बड़ी संख्या में मुस्लिम महिलाएँ इस डर के कारण हाइमेनोप्लास्टी ऑपरेशन करा रही हैं कि ऐसा न करने पर उनके पति उन्हें स्वीकार नहीं करेंगे।
हाइमेनोप्लास्टी एक ऑपरेशन होता है जो कौमार्य भंग होने के बारे में जानकारी देने वाली झिल्ली (हाइमेन) की मरम्मत कर उसे यथास्थान पर पूर्ववत करने के लिए किया जाता है।
'न्यूयॉर्क टाइम्स' में प्रकाशित एक खबर में कहा गया है कि निजी क्लीनिक में हाइमेनोप्लास्टी के ऑपरेशन पर 2900 डॉलर से अधिक राशि खर्च हो सकती है। इसके बावजूद बड़ी संख्या में मुस्लिम महिलाएँ यूरोप में यह ऑपरेशन करा रही हैं। उन्हें आशंका होती है कि हाइमेनोप्लास्टी न कराने पर उनके पति उन्हें स्वीकार नहीं करेंगे।
अखबार में 23 वर्षीय एक फ्रांसीसी छात्रा के हवाले से कहा गया है कि 30 मिनट की यह प्रक्रिया कौमार्य के अहसास के साथ-साथ नया जीवन प्रदान करती है। उसने कहा मेरी संस्कृति में कुआँरी न होना अच्छी बात नहीं होती। मेरे लिए जिंदगी से अधिक महत्वपूर्ण कौमार्य है।
अखबार लिखता है कि यूरोप में मुस्लिम आबादी बढ़ने के साथ साथ कई मुस्लिम महिलाएँ अपनी परंपरा और यूरोपीय समाज की स्वतंत्रता की ऊहापोह में उलझ रही हैं।
स्त्री रोग विशेषज्ञों के हवाले से अखबार में कहा गया है कि कुछ साल पहले कई मुस्लिम महिलाएँ कौमार्यता का प्रमाण-पत्र सबूत के तौर पर माँगती थीं। इसके बाद हाइमेनोप्लास्टी के लिए कास्मेटिक सर्जरी कराने का चलन चल पड़ा।
इन विशेषज्ञों का कहना है कि अगर हाइमेनोप्लास्टी सही तरीके से की जाए तो इसका पता नहीं लगाया जा सकता और महिलाओं की आशंका भी दूर हो जाती है।
लंदन में रह रही एक हाइमेनोप्लास्टी विशेषज्ञ डॉक्टर हाइकेम मौलेम ने कहा कि यूरोप में ज्यादा खुले माहौल में रहने वाली मुस्लिम महिलाओं को अब अपने विवाह पूर्व के यौन संबंध से परेशान होने की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि अब कौमार्यता पुन: हासिल करने का उपाय है।
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