ऑस्ट्रेलियाई प्रशासन ने ग्लासगो हवाई अड्डे पर हमले के विफल प्रयास के मामले में गलत तरीके से आरोपी ठहराए गए भारतीय डॉक्टर मोहम्मद हनीफ से संबंधित दस्तावेज जारी करने से इनकार कर दिया है। आव्रजन विभाग ने सूचना की आजादी के तहत हनीफ मामले से संबंधित दस्तावेजों के जारी करने पर रोक लगा दी है और साथ ही इन्हें जारी किए जाने की किसी भी संभावना से इनकार किया है।
'द ऑस्ट्रेलियन' ने यह जानकारी दी है। हनीफ के वकीलों ने अदालत से आव्रजन विभाग के फैसले को पलटने की अपील की थी। उनका कहना है कि इससे मामले की आगे की जाँच बाधित होगी तथा नौकरशाह मंत्रियों को स्वतंत्र सलाह देने से हिचकेंगे। इससे पूर्व संघीय अटार्नी जनरल रॉबर्ट मैकलिलेंड का कार्यालय ऑस्ट्रेलिया संघीय पुलिस समेत सरकारी एजेंसियों की कार्रवाइयों पर विचार के लिए जाँच को बढ़ाने से इनकार कर चुका है।
कार्यालय का कहना है कि हनीफ अभी भी संदिग्ध है और जाँच के दायरे में है। गौरतलब है कि पिछले वर्ष ब्रिटेन में विफल कार बम हमले से जुड़े हनीफ के चचेरे भाई के पास से उसका सिम कार्ड कथित रूप से बरामद होने के बाद उसे आतंकवादी संगठन की सहायता करने का आरोपी ठहराया गया था। हिरासत में तीन सप्ताह बिताने के बाद हनीफ पर लगे आरोप हटा लिए गए थे, लेकिन सरकार ने चरित्र के आधार पर उसका कामकाजी वीजा स्थगित कर दिया था। हालाँकि ऑस्ट्रेलियाई अदालत ने सरकार के निर्देश को रद्द करते हुए उसका वीजा बहाल कर दिया था।
अप्रैल में इस मामले में ऑस्ट्रेलियाई जाँच शुरू की गई थी। हालाँकि सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश जॉन क्लार्क की अगुवाई में शुरू की गई जाँच के बंद कमरे में होने तथा दस्तावेजों को जारी कराने का अधिकार जाँच आयोग को नहीं दिए जाने तथा मुख्य गवाहों को सबूत पेश करने या जिरह के लिए मजबूर नहीं करने के चलते इसकी आलोचना हो रही है। हनीफ के एक वकील रोड होगसन ने इस सप्ताह मैकलिलेंड से लिखित में अपील की थी कि क्लार्क द्वारा की जा रही जाँच की समयावधि को बढ़ाकर ऑस्ट्रेलियाई संघीय पुलिस की मौजूदा जाँच तक उसका विस्तार किया जाए। क्लार्क ने संकेत दिया कि जाँच का दायरा पिछले वर्ष दो जुलाई को हनीफ को गिरफ्तार किए जाने तथा 28 जुलाई को उसके भारत रवाना होने की अवधि के बीच ही सीमित रहेगा। होगसन ने तर्क दिया कि यदि क्लार्क अपनी जाँच को जुलाई 2007 की घटनाओं तक सीमित रखते हैं तो पुलिस तथा उसके आयुक्त के आचरण को लेकर उभरे महत्वपूर्ण सवालों का जवाब नहीं मिल पाएगा। हनीफ के खिलाफ आरोपों को वापस लिए जाने के बाद से ऑस्ट्रेलियाई संघीय पुलिस की जाँच पर अब तक जनता का करीब 80 लाख डॉलर खर्च हो चुका है। हनीफ का दूसरा चचेरा भाई सबील अहमद ब्रिटेन की जेल में 18 माह बिताने के बाद भारत पहुँच गया है। विफल आतंकवादी हमले में शामिल होने को लेकर उसे सजा सुनाई गई थी।
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