म्याँमार में आए भयंकर तूफान में अपने नातेर-रिश्तेदारों को खो देने वाले लोग अब खुद की जिन्दगी से जद्दोजेहद करने में लगे हैं। उनकी आँखों में आँसू और मन में तरह-तरह की आशंकाएँ हैं। जिनके परिजन इस भयावह आपदा में मारे जा चुके हैं वे तो शायद अब सब्र की बात सोचने लगे हैं, लेकिन जिनके परिजन लापता हैं, वे निराशा और आशा के बीच अंतर्द्वंद्व से ग्रसित हैं।
लोगों के मन में 65 हजार से अधिक जानें जाने और सब कुछ तबाह हो जाने का दु:ख है तो वहीं अँधेरे के बाद सुबह की किरण के रूप में कई जगह नवजातों की किलकारियाँ भी गूँजती नजर आती हैं।
यह मौत के बाद जिन्दगी के फिर से पैदा होने का सबूत है। आन टे नाम की महिला के घर को जब तूफान से उठी पानी की लहरों ने घेर लिया तो उसने अपने आठ साल के बेटे को उठाया और सुरक्षित स्थान पर चली गई।
वहाँ उसने एक नन्ही जान को जन्म दिया। आन टे का पति लापता है, लेकिन उसके बच्चे सुरक्षित हैं। वह न तो इस बात को लेकर आश्वस्त है कि उसका लापता पति लौट आएगा और न ही इस बात को स्वीकार कर पा रही है कि कुदरत के इस कहर में शायद उसके पति की भी मौत हो गई होगी।
वह इस समय एक बौद्ध मठ में अपने क्षेत्र के 150 ऐसे अन्य लोगों के साथ रह रहीं है जो तूफान के भयानक कहर के बावजूद जीवित बच गए। इनमें आधे से अधिक बच्चे हैं।
ऐसे लोग भी हैं जिनके घर तूफानी कहर से नष्ट हो गए हैं और उनके बहुत से प्रियजन भी असमय ही काल के ग्रास बन गए। म्याँमार के तटीय इलाकों में हर ओर मौत का सन्नाटा पसरा है, जहाँ सिर्फ राहत और बचाव टीमों की हलचल नजर आती है।
आन टे हजारों मौतों के बाद एक नई जान को जन्म देने के लिए खुद को भाग्यशाली मानती है लेकिन अपने पति के लापता हो जाने को लेकर वह खुद को अभागिन भी मान रही है।
वह इस समय जिस बौद्ध मठ में रह रही है उसकी छत टपक रही है। उसने कहा कि मेरी बच्ची मेरे साथ है। मैं उसे भीगने से बचाने की कोशिश करती हूँ, लेकिन बरसात के समय यह कोशिश सफल नहीं हो पाती।
विपदा के मारे लोगों की अधिक संख्या के कारण उसे रात के समय सोने के लिए किसी कमरे में भी जगह नहीं मिल पाती। उसकी बच्ची ने अभी-अभी जन्म लिया है, इसलिए उसे और भी अधिक परेशानी हो रही है।
शनिवार को आए तूफान नर्गिस ने ऐसा कहर बरपाया है जो म्याँमार के आधुनिक इतिहास में अब तक कभी नहीं देखा गया।
हवाएँ 120 मील प्रतिघंटे की रफ्तार से आईं और तटीय इलाकों में 12 फुट ऊँची लहरें उठ आईं। लोगों के घर पानी में डूब गए। तूफान से म्याँमार में 65 हजार से अधिक लोग मारे गए हैं और इस आँकड़े के एक लाख से ऊपर पहुँचने की आशंका है जबकि 10 लाख से अधिक लोग बेघर हो गए हैं।
यांगून के 100 किलोमीटर दक्षिण पश्चिम में स्थित काहमू इस मामले में थोड़ा भाग्यशाली रहा। अभी यहाँ मौतों की कोई पुष्टि नहीं हुई है लेकिन शहर के कुछ लोग लापता जरूर हैं।
बौद्ध मठ के एक कोने में कुछ बच्चों का शोर सुनाई देता है जिन्हें खाने के लिए थोड़े से चावल मिले हैं।
बुजुर्ग महिला शीवी के चेहरे पर थकान दिखाई दे रही है। उनके तन पर मैले कुचैले कपड़े हैं। उन्होंने अपनी जिन्दगी में म्याँमार में ऐसा विनाश कभी नहीं देखा है।
उन्होंने कहा कि हम फिर भी थोड़े से भाग्यशाली हैं। हमारे पास वाले शहर में सैकड़ों लोग मारे गए हैं। शीवी की बेटी डाथे अपने तीन बच्चों से घिरी हुई हैं। उसने कहा मेरे बच्चे सारी रात रोते रहे क्योंकि शाम उन्हें पर्याप्त खाना नहीं मिला।
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