भांगड़ा गीतों की धुनों पर लोगों को थिरकने के लिए मजबूर कर देने वाले मलकीतसिंह ऐसे पहले पंजाबी गायक बन गए हैं, जिन्हें महारानी एलिजाबेथ ने मोस्ट एक्सिलेंट आर्डर ऑफ द ब्रिटिश अंपायर (एमबीई) अवार्ड से सम्मानित किया।
बकिंघम पैलेस में सम्मानित किए जाने के बाद 45 वर्षीय मलकीतसिंह ने कहा कि यह सम्मान पाकर मैं अभिभूत हूँ और अपनी खुशी को काबू नहीं कर सकता। मलकीत के अलावा 12 अन्य भारतीयों को एमबीई अवार्ड से और दो अन्य को आर्डर ऑफ द ब्रिटिश अंपायर (ओबीई) अवार्ड से सम्मानित किया गया।
मलकीत ने कहा कि महारानी उन्हें भांगड़ा के पारंपरिक परिधान में देख कर खुश हो गईं। बकौल मलकीत महारानी ने उनसे कहा कि आपके कपड़े मुझे अच्छे लगे। मुझे भारतीय संगीत का भी शौक है। उन्होंने कहा कि यह केवल मेरे लिए ही नहीं बल्कि सभी भारतीयों के लिए सम्मान की बात है। यह अवार्ड पाकर मुझे गर्व महसूस हो रहा है। मलकीत का कहना है कि 1984 में जब वह ब्रिटेन आए थे तो वहाँ अलाप और हीरा ग्रुप सहित कई जाने-माने भांगड़ा गुप थे। लेकिन कड़ी मेहनत और समर्पण से मलकीत ने अपनी जगह बना ही ली। मलकीत ने कहा कि भारतीय आगंतुकों के लिए बकिंघम पैलेस के बाहर तस्वीर लेना भी दुर्लभ होता है लेकिन मैंने कभी नहीं सोचा था कि मुझे इस पैलेस के अंदर महारानी स्वयं सम्मानित करेंगीं। जालंधर जिले के हुसैनपुर गाँव से लंदन तक का सफर याद करते हुए मलकीत ने कहा कि उनकी माँ अगर आज होती तो बहुत खुश होती। लेकिन उनका इसी साल जनवरी में निधन हो चुका है। अब तक मलकीत के 21 अलबम आए हैं और सभी हिट हुए हैं। मोस्ट एक्सिलेंट आर्डर ऑफ द ब्रिटिश अंपायर की स्थापना किंग जॉर्ज पंचम ने 1917 में की थी।
अब तक मलकीत 28 से अधिक देशों में अपने कार्यक्रम पेश कर चुके हैं। हिंदी फिल्मों में भी उनके गीत लोकप्रिय हुए हैं। 1980 के दशक में उनके गीतों नच गिद्दे विच, गुर नाल इश्क मिठाँ, तूतक तूतक तूतिया ने जम कर धूम मचाई थी।
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