पाकिस्तान सरकार द्वारा देश के उत्तर पश्चिमी हिस्से में कबाइली नेताओं के साथ सुलह-समझौते के प्रयास अमेरिका के लिए चुनौती पैदा कर सकते हैं। पाकिस्तान के इस हिस्से को हजारों उग्रवादियों के लिए एक सुरक्षित स्थान माना जाता है।
अमेरिकी सदन की विदेश मामलों संबंधी समिति के अध्यक्ष होवार्ड बरमन ने कहा कि पाकिस्तान का कबाइली इलाका उन हजारों उग्रवादियों और आतंकवादियों के लिए सुरक्षित शरण स्थली है, जो न केवल पाकिस्तान और अफगानिस्तान को अस्थिर करना चाहते हैं बल्कि पूरी दुनिया में उनकी हमलों की भी योजना है। कैलिफोर्निया के सांसद ने कहा कि हालाँकि पाक सरकार और कबाइली नेताओं के बीच सुलह समझौते की हालिया रिपोर्टों ने अमेरिका के लिए एक चुनौती पैदा कर दी है। हम कुछ कबाइली नेताओं के साथ बातचीत की जरूरत और किसी समझौते की परवाह किए बिना अफगानिस्तान में अमेरिका तथा नाटो सैनिकों के खिलाफ लड़ाई जारी रखने वाले उग्रवादियों से समझौते के खिलाफ डटे रहने के बीच किस प्रकार संतुलन कायम कर सकते हैं। सरकार के जवाबदेही कार्यालय की रिपोर्ट का जिक्र करते हुए बरमन ने आरोप लगाया है कि क्षेत्र में आतंकवाद के खिलाफ संघर्ष में सहयोग के लिए अमेरिका द्वारा दिए गए धन को लेकर कोई दूरदर्शिता नहीं है। बरमन ने कहा कि उदाहरण के लिए अमेरिकी सरकार से पाकिस्तान के हवाई रक्षा रडार प्रबंधन का खर्च उठाने को क्यों कहा जा रहा है।
अल कायदा की तो कोई वायुसेना नहीं है और इस कोष का मतलब आतंकवाद के खिलाफ संघर्ष में मदद करना है न कि पाकिस्तान की पारंपरिक युद्धक क्षमता को बढ़ाना। इस बीच भारत तथा संयुक्त राष्ट्र में अमेरिका के पूर्व राजदूत थामस पिकरिंग ने तर्क दिया है कि दो सत्तारूढ़ दलों द्वारा स्वतंत्र रास्ता अख्तियार करने तथा राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ की नीतियों से हटने के कारण आतंकवाद के खिलाफ युद्ध में पाकिस्तान के प्रयास कमजोर हुए हैं। पिकरिंग ने कहा कि बेनजीर भुट्टो की हत्या से कमजोर हुई दो विपक्षी पार्टियों के बारे में निश्चित नहीं है कि वे ऐसा नेतृत्व दे पाने में सक्षम होंगी जो पाकिस्तान और अफगानिस्तान में आतंकवाद एवं इस्लामिक कट्टरपंथ के खिलाफ संघर्ष को जारी रखने और सफलता सुनिश्चित कराने में मदद कर सके। उन्होंने कहा कि कम अवधि में ही पाकिस्तान ने दिखा दिया है कि मुशर्रफ की नीतियों से हटने तथा विपक्षी दलों द्वारा स्वतंत्र विचारधारा अपनाए जाने के कारण वह इन प्रयासों में कमजोर हुआ है। दोनों विपक्षी दलों को इन खतरों का पूरी तरह आभास है, लेकिन वे पाकिस्तान के भीतर खुद को अमेरिका के पिछलग्गू के रूप में नहीं देखा जाना चाहते। पिकरिंग ने आगे कहा कि पिछले चार पाँच सालों के पाकिस्तान के प्रयासों के बावजूद तालिबान और अल कायदा का अफगानिस्तान में आकार और आधार खत्म नहीं हुआ है बल्कि कुछ की ताकत और नियंत्रण बढ़ा है। पाकिस्तान में नई सरकार के गठन का स्वागत करते हुए समिति की एक शीर्ष रिपब्लिकन ऐना रोस लेटिनेन ने कहा कि पाकिस्तान में सुरक्षा तथा स्थिरता में अमेरिका के व्यापक हित है। उन्होंने कहा कि नई सरकार को दुरूह एजेंडे से जूझना पड़ रहा है, जिसमें हिंसक इस्लामी कट्टरपंथियों के सुरक्षित ठिकानों को नष्ट करना तथा स्थानीय इस्लामी उग्रवादियों का आधार कम करना शामिल है।
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