अमेरिका ने आशंका जाहिर की है कि लेटिन अमेरिका में ईरान के बढ़ते प्रभाव से उसकी सुरक्षा को खतरा पैदा हो सकता है।
अमेरिका के सहायक विदेशमंत्री थॉमस शेनन ने कहा कि हमें इस बात की चिंता है कि ईरान के साथ किसी संघर्ष की स्थिति में वह लेटिन अमेरिका में अपनी मौजूदगी का हमारे खिलाफ इस्तेमाल कर सकता है।
उल्लेखनीय है कि लेटिन अमेरिका में वामपंथी सरकारों के उभार से हाल के वर्षों में अमेरिका का प्रभाव घटा है। वेनेजुएला, क्यूबा, निकारागुआ, बोलीविया सहित कई अन्य देशों ने अमेरिका के चिर प्रतिद्वंद्वी ईरान से दोस्ती कर ली है। अपने पिछवाडे़ ईरान की मौजूदगी अमेरिका को नागवार गुजर रही है।
शेनन ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग-थलग पड़ा ईरान यह दिखाना चाहता है कि लेटिन अमेरिका में उसके कई देशों से मधुर संबंध हैं जो कि परंपरागत रूप से अमेरिकी प्रभाव वाला क्षेत्र रहा है।
अमेरिका ईरान पर आतंकवादी गुटों का समर्थन करने और चोरी छिपे परमाणु हथियार विकसित करने का आरोप लगाता रहा है। ऐसे में कभी उसके काफी नजदीक रहे कई लेटिन अमेरिकी देशों के ईरान के साथ पींगें बढ़ाने से अमेरिका की नींद उड़ी हुई है।
शेनन ने क्षेत्र के देशों से ईरान पर लगे संयुक्त राष्ट्र प्रतिबंधों का सम्मान करने का आग्रह करते हुए इन देशों को याद दिलाया कि 1990 के दशक में अर्जेंटीना की राजधानी ब्यूनस आयर्स में इसराइली दूतावास और यहूदी समुदाय पर हुए हमले के पीछे ईरान का हाथ था।
उन्होंने कहा कि हम लेटिन अमेरिका के अपने दोस्तों और सहयोगियों से सावधान रहने का आग्रह करते हैं। अर्जेंटीना में हुए हमले इस बात को दर्शाते हैं कि ईरान अमेरिकी महाद्वीपों में आतंकवादी हमलों को अंजाम देने में सक्षम है। हालाँकि ईरान ब्यूनस आयर्स में हुए हमलों में हाथ होने से इनकार करता आया है। इन हमलों में 100 से अधिक लोग मारे गए थे।
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