कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी के एक प्रोफेसर को बंकिमचंद्र चटर्जी के उपन्यास 'आनंदमठ' का संपूर्ण अंग्रेजी अनुवाद करने के लिए प्रतिष्ठित पुरस्कार से सम्मानित किया गया है।
यूनिवर्सिटी की फैकल्टी ऑफ डिविनिटी के प्रोफेसर जूलियस लिपनेर को 1882 में लिखे गए उपन्यास का अंग्रेजी अनुवाद करने के लिए वर्ष 2008 के 'एके रामानुजम बुक प्राइज फॉर ट्रांसलेशन' का पुरस्कार दिया गया है।
यह उपन्यास भारत के राष्ट्रीय गीत की व्याख्या करने के साथ ही स्वतंत्रता सेनानियों की एक पूरी पीढ़ी को प्रेरित करने वाला था।
भारतीय साहित्य के विद्वान एके रामानुजम के नाम पर शुरू किया गया पुरस्कार किसी भी दक्षिण एशियाई भाषा में अनुवाद के लिए प्रदान किया जाता है। इसके दायरे में किसी इतिहास काल पर किया गया काम भी शामिल है।
पहले अप्रकाशित अनुवादों को पुरस्कार मिलने की अधिक संभावना रहती थी। प्रोफेसर लिपनेर द्वारा आनंदमठ का अनुवादित संस्करण 20वीं सदी की शुरुआत के बाद से पहला अनुवाद है तथा इसे ऐतिहासिक तथ्यों की दृष्टि से एकमात्र संपूर्ण अनुवाद कहा जा सकता है।
इसकी प्रस्तावना में उपन्यासों के ऐतिहासिक आधार तथा लेखक की पृष्ठभूमि के बारे में विचार-विमर्श किया गया है। प्रोफेसर लिपनेर को यह पुरस्कार दक्षिण एशिया काउंसिल ने प्रदान किया जो अमेरिकन एसोसिएशन फोर एशियन स्टडीज का हिस्सा है।
प्रोफेसर लिपनेर भारत में ही पैदा हुए और वहीं पले-बढ़े हैं तथा शोध आदि के लिए नियमित रूप से वहाँ जाते रहते हैं। वे यूनिवर्सिटी में हिंदूवाद तथा धर्मों का तुलनात्मक अध्ययन विषय पढ़ाते हैं और दुनियाभर में विभिन्न संस्थानों में लेक्चर दे चुके हैं।
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