इराक और अफगानिस्तान में सैन्य अभियान शुरू करने की बदनामी झेल रहे अमेरिकी राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू बुश के सिर पर अब सैनिकों की शादियाँ टूटने का ठीकरा फोड़ दिया गया है।
अमेरीकी सेना की हाल ही में जारी एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए सेना के केप्टन नाथन मेकलीन ने बुधवार को यहाँ एक साक्षात्कार में यह बात कही। उन्होंने कहा कि लंबे समय तक घर से दूर रहने के कारण सैनिकों की शादियाँ टूटने की दर में अचानक बढ़ोतरी हो गई है। इतना ही नहीं वरिष्ठ सैनिक भी इस दंश से पीड़ित हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक इराक और अफगानिस्तान में तैनात पाँच में से एक वरिष्ठ सैनिक मानसिक बीमारी से पीड़ित हैं और इसका खामियाजा इनके परिवारों को भुगतना पड़ रहा है। केप्टन मेकलीन ने बताया कि सबसे ज्यादा परेशानी अविवाहित और विवाहित युवा सैनिकों को है।
जिनकी शादी नहीं हुई, वे शादीशुदा सैनिकों के तलाक की बढ़ती घटनाओं को देखकर इस पचड़े में स्वयं को डालने की हिम्मत ही नहीं जुटा पा रहे हैं। इसके अलावा शादीशुदा सैनिकों की पत्नियाँ लंबे समय तक विरह की पीड़ा न झेल पाने के कारण तलाक का विकल्प चुन लेती हैं।
सेना के मानसिक स्वास्थ्य सलाहकार दल की ओर से इराक और अफगानिस्तान में तैनात सैनिकों के स्वास्थ्य परीक्षण के आधार पर गत फरवरी में जारी रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि सैनिकों की एकमुश्त 15 महीने की तैनाती का प्रावधान शादियाँ तोड़ने के लिए किया गया है। हालाँकि इस रिपोर्ट के बाद बुश इस अवधि को घटाकर 12 माह किए जाने की बात कह चुके हैं, लेकिन अब तक सैनिकों का काफी निजी नुकसान हो चुका है।
रिपोर्ट के अनुसार तैनाती के शुरुआती चार महीनों में छह प्रतिशत सैनिकों की पत्नियाँ तलाक के बारे में सोचने लगती है और 14वें महीने तक यह फैसले पर अमल कर लिया जाता है। इसके अलावा 15वें महीने तक तलाक लेने वालों का प्रतिशत 20 हो जाता है।
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