अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खाद्य पदार्थों की कीमतों में बढ़ोतरी के बाद अमेरिका ने अब तेल मूल्यवृद्धि का ठीकरा भी भारत और चीन के सिर फोड़ा है। उसने कहा है कि इन दोनों देशों में तेल की अधिक खपत होने से ही तेल के दाम आसमान छू रहे हैं।
व्हाइट हाउस के उपप्रवक्ता स्काट स्टेंजेल ने ब्रीफिंग में कहा कि भारत और चीन जैसे कई विकासशील देशों में तेल की माँग में भारी वृद्धि हुई है। इसका असर निश्चित रूप से कीमतों पर पड़ रहा है। उन्होंने कच्चे तेल की कीमतें 120 डॉलर के स्तर से पार करने के संबंध में पूछे गए सवाल के जवाब में यह बात कही।
स्टेंजेल ने जोर दिया कि अमेरिका के लिए ऊर्जा के विदेशी स्रोतों पर निर्भरता कम करना महत्वपूर्ण है। घरेलू उत्खनन की जरूरत पर उन्होंने कहा कि हमें रिफाइनरियों के निर्माण की दृष्टि से भी काफी कुछ करना होगा। करीब 30 सालों से हमने रिफाइनरी नहीं बनाई है।
हालाँकि स्टेंजेल ने बुश की उस टिप्पणी पर बात नहीं की, जिसमें उन्होंने भारतीयों की खान-पान की आदतों के चलते खाद्य पदार्थों की कीमतें बढ़ने की बात कही थी। तीन दिन पहले बुश ने विशेष रूप से भारतीय मध्यम वर्ग का जिक्र करते हुए तर्क दिया था कि उसकी बेहतर पोषण की माँग दुनिया में खाद्य पदार्थो की कीमतों में इजाफे का एक कारण है।
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