म्याँमार में भीषण चक्रवाती तूफान नर्गिस से मरने वालों की संख्या 22 हजार 500 तक पहुँच गई है, जबकि 41 हजार से ज्यादा लोग लापता बताए गए हैं।
म्याँमार की सरकारी मीडिया ने यह आँकड़े जारी किए हैं। राहत एवं पुर्नवास मंत्री माऊँग माऊँग स्वी ने मंगलवार को बताया कि तूफान के कारण समुद्र में चार मीटर तक ऊँची लहरें उठीं जो विनाश का सबसे बड़ा कारण साबित हुईं। म्याँमार में चारों ओर तूफान से हुई तबाही का मंजर है।
इस स्थिति से निबटने के लिए राजधानी यांगून को मिलाकर पाँच इलाकों में आपातकाल लागू कर दिया गया है। तूफान के कारण टेलीफोन और दूसरी संचार व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हुई है। यांगून के आसपास के इलाकों के लोगों का कहना है कि तूफान की चपेट में आने से कोई घर नहीं बच पाया है। कुछ घर तो पूरी तरह जड़ से उखड़ चुके हैं।
स्थानीय प्रशासन लोगों को धार्मिक स्थलों पर आश्रय दे रहा है। सड़कों पर पर इक्का-दुक्का बसें ही चल रही हैं, जो बसें चल भी रही हैं तो उन्होंने अपना किराया पाँच गुना तक बढ़ा दिया है।
तूफान के बाद म्याँमार में चीजों के दाम आसमान छूने लगे हैं। घरों की छत को बनाने के लिए इस्तेमाल होने वाले लोहे के दाम आसमान छूने लगे हैं। यहाँ तक कि कीलें खरीदना भी अब मुश्किल हो रहा है। बौद्ध भिक्षु हर तरफ मदद के लिए आगे आ रहे हैं। केमेडीन और सानचुंग इलाकों में तकरीबन 200 भिक्षुओं को लोगों की मदद और राहत के काम में लगे देखा गया।
म्याँमार में जगह-जगह पेड गिरे हुए हैं। लोग खुद ही राहत कार्य में जुटे हैं वे खुद अपने हाथों से सड़क पर गिरे पेड़ों को काट-काट कर हटा रहे हैं, जबकि इस तरह की आपदा से निपटने के लिए बनाया गया सेना का दस्ता हाथ पर हाथ धरे सिर्फ देख रहा है। हालाँकि इस दस्ते में आम आदमी भी शामिल हैं, लेकिन वो कुछ नहीं कर पा रहे हैं।
यांगून विश्व के शेष हिस्से से पूरी तरह से कट गया है। पीने का पानी नहीं है। सड़कें बंद हैं। कहीं आना-जाना मुश्किल है। चीजें महँगी हो गई हैं। पानी सप्ताई करने वाली पाइप लाइनें सूखी पड़ी हैं। लोग अगर अपने पंप से पानी ले भी लेते हैं तो पानी की निकासी के लिए कोई रास्ता तक नहीं है।
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