मानवाधिकारों के उल्लंघन के आरोप में मुकदमों का सामना कर रहे पेरू के पूर्व राष्ट्रपति अल्बर्टो फुजीमोरी को कल कार्यवाही के दौरान हँसी के दौरे पड़ने लगे। वे इतना हँसे कि स्थिति नियंत्रण से बाहर हो गई। कार्यवाही के दौरान जब उन्हें बताया गया कि उनके सैन्य सहयोगियों के गुप्तचर दरवाजे के छेद से झाँकते थे कि वह क्या पहन रहे हैं। इस बात को सुनकर वे अपनी हँसी को रोक नहीं सके। उनकी लगातार हँसी से अदालत कक्ष में कई लोगों को आश्चर्य हुआ। कई मिनटों के दौरे के बाद उन्होंने अपने हाथों से चेहरे को ढँककर किसी तरह हँसी रोकी। यह वाकया तब पेश आया जब एक गवाह सेना के अवकाश प्राप्त कर्नल मिगेल बर्नल नेयरा ने कहा कि जब राष्ट्रपति कहीं जा रहे होते थे तो उनके सैन्य सहयोगियों के गुप्तचर दरवाजे के छेद से झाँकते थे। नेयरा ने कहा कि राष्ट्रपति द्वारा पहने जाने वाले कपड़ों के आधार पर ही उनकी यात्रा का अनुमान लगाया जाता था। अगर राष्ट्रपति आधे बाँह के कपड़े पहनते तो इससे अनुमान लगाया जाता कि वे किसी गर्म प्रदेश जा रहे हैं तथा मोटे कपड़े के आधार पर उनकी किसी ठंडे प्रदेश की यात्रा का अनुमान लगाया जाता था।
हँसी पर नियंत्रण पाने के बाद फुजीमोरी ने जज को बताया कि उनके सहयोगियों को अंतिम मिनट तक यह कभी पता नहीं चल पाता था कि वह कहाँ जा रहे हैं। यह उनकी सुरक्षा के कड़े इंतजामों के कारण होता था। ये सुरक्षा उपाय उन पर वामपंथी विद्रोहियों तथा आतंकवादियों के हमले रोकने के उद्देश्य से किए गए थे। 69 साल के फुजीमोरी कथित रूप से 24 लोगों की हत्या के आरोप में मुकदमों का सामना कर रहे हैं। उन पर आरोप है कि 1991 तथा 1992 में उन्होंने दो सामूहिक हत्या अभियानों के आदेश दिए थे। ये आरोप अगर साबित हो जाते हैं तो पेरू के इस पूर्व शासक को 30 साल के कैद की सजा सुनाई जा सकती है। ये मुकदमे पिछले साल दिसंबर में शुरू हुए हैं। 1990 से 2000 के उनके कार्यकाल में मानवाधिकारों के हनन के आरोप में फुजीमोरी को सितंबर में चिली से पेरू प्रत्यर्पित कराया गया था। फुजीमोरी ने अपने विद्रोहियों के खिलाफ ऐसे किसी भी गंदे अभियान शुरू करने के आरोप से इनकार किया है।
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