पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) के सह-अध्यक्ष आसिफ अली जरदारी ने पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के उपचुनाव न लड़ने के फैसले के बाद स्वयं भी चुनाव में न उतरने के संकेत दिए हैं।
पाकिस्तानी अखबार 'द न्यूज' में जरदारी के करीबी सहयोगियों के हवाले से यह जानकारी दी गई है। जरदारी ने कहा है कि मेरे नेशनल असेंबली में पहुँचने से प्रधानमंत्री यूसुफ रजा गिलानी की स्थिति कमजोर हो सकती है। मैं नहीं चाहता कि मेरी वजह से गिलानी खुद को दबाव में महसूस करें। रिपोर्ट के अनुसार जरदारी ने यह बात अपने एक सहयोगी से आगामी जून में होने वाले उपचुनाव में हिस्सा लेने के लिए दबाव डालने पर कही। गौरतलब है कि सत्तारूढ गठबंधन में पीपीपी के सहयोगी दल पाकिस्तान मुस्लिम लीग नवाज (पीएमएल) एनके अध्यक्ष शरीफ द्वारा चुनाव लड़ने की पहले घोषणा के बाद जरदारी ने भी इसमें हिस्सा लेने का मन बना लिया था।
उनकी दलील थी कि इससे दोनों बडे़ नेताओं के सदन में रहने के कारण नेशनल असेम्बली में संतुलन कायम रहेगा, लेकिन अब बर्खास्त न्यायाधीशों की बहाली के मामले में पीपीपी के नकारात्मक रवैये से क्षुब्ध होकर चुनाव में हिस्सा न लेने के शरीफ के फैसले के बाद जरदारी ने भी चुनावी जंग से खुद को अलग करने के संकेत दिए हैं।
हालाँकि इस बारे में अभी उन्होंने अपने पत्ते नहीं खोले हैं और उनकी चुनावी रणनीति फिलहाल पूरी तरह से गुप्त रखी गई है।
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