सत्तारूढ़ पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के साथ अनेक दौर की गुप्त चर्चा के बाद राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ संसद भंग करने और प्रधानमंत्री को बरखास्त करने का अधिकार छोड़ने के लिए तैयार हो गए हैं।
डॉन समाचार चैनल के मुताबिक विवादों में घिरे राष्ट्रपति ने पीपीपी के सह-अध्यक्ष आसिफ अली जरदारी को एक संदेशवाहक के जरिए यह बताया कि वे संविधान के अनुच्छेद 58 (2बी) के तहत प्राप्त अपने विशेषाधिकारों की समाप्ति को सैद्धांतिक मंजूरी देने के लिए तैयार हैं।
चैनल ने बताया कि मुशर्रफ के सहयोगियों और पीपीपी के बीच हुई कई दौर की वार्ता के बाद राष्ट्रपति के सहायकों ने जरदारी से संपर्क साधा। हालाँकि मुशर्रफ संविधान के दो विवादास्पद अनुच्छेदों को दो शर्तों पर औपचारिक रूप से निरस्त करने के लिए सहमत हुए।
पहला यह कि पिछले साल तीन नवम्बर को आपातकाल लगाने के बाद सेना प्रमुख के नाते उनके द्वारा की गई हर कार्रवाई को कानूनी जामा पहनाया जाए तथा दूसरी राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद से किसी तरह की छेड़-छाड़ न की जाए।
चैनल ने सूत्रों के हवाले से यह भी बताया कि मुर्शरफ अपने पूरे कार्यकाल तक बने रहने के लिए आपातकाल में बरखास्त किए गए दर्जनों जजों को फिर बहाल कर सकते हैं।
पीपीपी का कहना है कि वह मुर्शरफ के साथ कामचलाऊ रिश्ते रखने को तैयार है, वहीं पीएमएल (एन) प्रमुख नवाज शरीफ की ताजा माँग है कि 12 मई को अपदस्थ जजों की बहाली के साथ मुशर्रफ को पद छोड़ देना चाहिए।
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