तिब्बत में हिंसा के बाद पहली बार बौद्ध धर्मगुरु दलाई लामा के दूतों के साथ वार्ता से पहले चीन शनिवार को आक्रामक तेवर में दिखा और उसने हिंसा भड़काने के लिए बौद्ध धर्मगुरु को जिम्मेदार बताते हुए हिंसा की इन घटनाओं को पागलपन का 'आखिरी दौरा' करार दिया।
भारत में निर्वासित जीवन गुजार रहे दलाई लामा के दो प्रतिनिधि दक्षिण चीन के शेनजेन शहर में चीनी अधिकारियों से मुलाकात करेंगे। यह मुलाकात रविवार को शुरू होगी।
अंतरराष्ट्रीय समुदाय की ओर से दबाव के बाद चीन ने अगस्त में प्रस्तावित ओलिंपिक से पहले दलाई से वार्ता की पेशकश की। चीन को उम्मीद है कि जिस तरह मार्च से निर्वासित तिब्बतियों ने विरोध प्रदर्शन किए हैं, उससे ओलिंपिक प्रभावित नहीं होगा।
इस बीच दलाई के दूत लोदी ग्यारी और केलसांग ज्ञातसेन शनिवार को तीन दिन की यात्रा पर यहाँ पहुँचे। धर्मशाला में निर्वासित तिब्बत सरकार ने बताया कि दलाई के दोनों दूत तिब्बत में चीन की कार्रवाई पर दलाई लामा की गहरी चिंता से चीनी नेताओं को अवगत कराएँगे और साथ ही क्षेत्र में शांति लाने के संबंध में सलाह देंगे।
चीन ने आरोप लगाया है कि पिछले दो दशक में तिब्बत में हुए सबसे तीखे और जबरदस्त सरकार विरोधी प्रदर्शनों के पीछे बौद्ध धर्मगुरु का हाथ है। उल्लेखनीय है कि चीन ने पिछले हफ्ते 72 वर्षीय दलाई लामा से कहा कि वे वार्ता के इस अवसर का फायदा उठाएँ। बहरहाल इसके साथ ही चीन ने अपनी ये शर्तें भी दोहराई थीं कि उन्हें ओलिंपिक को नुकसान पहुँचाने की कोशिशें और अलगाववादी गतिविधियाँ रोकनी होंगी।
सरकार इस पर चुप रही कि अनौपचारिक वार्ता का मतलब क्या है। अलबत्ता सरकारी मीडिया ने दलाई लामा के खिलाफ हमलों का अपना सिलसिला जारी रखा।
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