अमेरिका के वैज्ञानिक अब एक अभियान सूरज तक भेजने की तैयारी कर रहे हैं ताकि सूरज अंतरिक्ष में जो आवेशित कणों की धाराएँ छोड़ता है उसका अध्ययन किया जा सके।
सूरज तक अभियान भेजने की यह कोई नई योजना नहीं है। पिछले तीन दशक से वैज्ञानिक इस परियोजना पर विचार कर रहे हैं। अब जॉन हापकिन्स यूनिवर्सिटी के अप्लाइड फिजिक्स लैबोरेटरी (एपीएल) के वैज्ञानिकों का एक दल अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के सोलर प्रोब अभियान के लिए एक विशेष अंतरिक्ष यान का विकास कर रहा है। इस परियोजना के तहत सोलर प्रोब को सूरज के पास से 125 मील प्रति सेकंड की रफ्तार से गुजरना है। प्रोब के इर्द-गिर्द कार्बन कंपोजिट ऊष्मा कवच होगा, जो 2600 डिग्री फैरनहीट तक के तापक्रम को बर्दाश्त कर सकता हो।
सोलर प्रोब को विकिरण के हमलों और ऊर्जाकृत धूल का इस स्तर पर सामना करना पड़ेगा जिससे अब तक किसी भी अंतरिक्ष यान को रूबरू नहीं होना पड़ा है।
साइंस डेली की एक रिपोर्ट में सोलर प्रोब परियोजना के वैज्ञानिक रॉबट डेकर ने कहा कि और खोज के तमाम अभियानों की तरह सोलर प्रोब भी संभवत: जितने सवालों का जवाब देगा, उससे ज्यादा सवालों को पैदा करेगा।
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