अमेरिका के राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू बुश ने विश्वव्यापी खाद्य संकट के लिए भारत के 35 करोड़ मध्यम वर्ग की समृद्धि को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा है कि इस वर्ग की बढ़ती माँगों के कारण खाद्य पदार्थो की कीमतों में उछाल आया है।
बुश के बयान के एक दिन पहले ही विदेश मंत्री कोंडोलीजा राइस ने भी यह कह कर विवाद पैदा कर दिया था कि 'भारत और चीन के लोगों की खुराक में वृद्धि' के कारण ही दुनिया में खाद्य संकट पैदा हुआ है।
बुश ने कहा कि भारत में मध्यम वर्ग की समृद्धि से उनका उपभोग बढ़ा है और बेहतर एवं पौष्टिक भोजन की माँग बढ़ने से खाद्य पदार्थो की कीमतें बढ़ी हैं। उन्होंने कहा कि भारत में 35 करोड़ ऐसे लोग हैं जो मध्य वर्ग में आते हैं। उनका मध्यम वर्ग हमारी पूरी आबादी से कहीं ज्यादा है। जब आप धन दौलत कमाना शुरू करते तो आप बेहतर एवं पौष्टिक भोजन की माँग करते हैं। इसीलिए माँग इतनी ज्यादा है और इससे कीमतों में उछाल आया है।
अमेरिकी राष्ट्रपति ने इस स्थिति को देश के लिए अवसर बताते हुए कहा कि विश्व में माँग बढ़ने से विकासशील देशों की समृद्धि भी बढ़ी है। यह अमेरिका के लिए अच्छी बात है। उन्होंने कहा कि यह आपके लिए अच्छी स्थिति होने जा रही है, क्योंकि आपके उत्पाद विकासशील खासकर बड़े विकासशील देशों में बिकेंगें।
बुश ने अमेरिका की एथेवाल नीति का बचाव करते हुए कहा कि वह इस बात से सहमत नहीं है कि एथेनाल नीति के कारण खाद्य पदार्थो की कीमतें बढ़ी है।
बुश के बयान को कांग्रेस ने किया खारिज
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