संयुक्त राष्ट्र के खाद्यान्न मामलों के नए शीर्ष सलाहकार ने अन्न संकट के लिए विश्व की बड़ी शक्तियों की गलत नीति को जिम्मेदार ठहराया है।
पदभार संभालने के बाद एक अखबार को दिए साक्षात्कार में फ्रांसीसी ओलिविये दे सुते ने कहा कि सस्ता खाद्यान्न अब दूर की कोडी़ बनता जा रहा है, विश्व को इसके लिए तैयार रहना चाहिए। मौजूदा संकट का आकलन नहीं करना, माफी योग्य नहीं है।
सुते ने कहा हम 20 साल से की जा रही गलतियों की कीमत चुका रहे हैं। विश्व बैंक और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष ने कृषि में निवेश की अनदेखी की। मुद्रा कोष ने विकासशील देशों को आत्मनिर्भरता के लिए खाद्यान की जगह निर्यातक नकदी फसलों में निवेश के लिए प्रोत्साहित किया।
उन्होंने कहा कि अमेरिका ब्राजील, कनाडा और यूरोप में अर्थव्यवस्था मजबूत करने के लिए मक्का, सोयाबीन और चीनी की जगह इथेनॉल, बॉयोडीजल की खेती पर करोड़ों डॉलर खर्च किए गए, हकीकत में इससे संकट बढ़ा है।
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