भारत में पिछले साल हिंदू और मुसलमानों को निशाना बना कर किए गए आतंकवादी हमलों के पीछे इन दोनों समुदायों में धार्मिक दंगे भड़काने की साजिश हो सकती है।
अमेरिकी विदेश मंत्रालय की आतंकवाद पर जारी की गई वार्षिक रिपोर्ट में यह आशंका जताई गई है। रिपोर्ट में भारतीय खुफिया अधिकारियो के हवाले से बताया गया कि देश के विभिन्न हिस्सों में पिछले साल किए गए आतंकवादी हमलों के पीछे पाकिस्तान और बांग्लादेश से संचालित संगठन खासकर लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद और हरकत-उल-जेहाद इस्लामी का हाथ रहा।
ये संगठन जम्मू-कश्मीर में भी सक्रिय हैं और अब इनके हमलों में हिंदू-मुसलमानों को निशाना बनाने की कोशिश की गई, जिससे इनके बीच मजहबी दंगे भड़कें। रिपोर्ट में भारत सरकार की मई 2007 की उस रिपोर्ट का भी संज्ञान लिया गया है, जिसमें आतंकवादी घुसपैठ में कमी आने की बात स्वीकार की गई थी, साथ ही इसमें यह भी जिक्र किया गया था कि आतंकवादी अब नए रास्ते तलाशते हुए बांग्लादेश और नेपाल के रास्ते भारत में घुसपैठ कर रहे हैं।
रिपार्ट के अनुसार भारत अभी भी दुनिया के सर्वाधिक आतंकवाद प्रभावित देशों की सूची में शामिल है। इसके अनुसार पिछले साल जम्मू- कश्मीर सहित देश के अन्य भागों में आतंकवादी हमलों, मध्य और पूर्वी भागों में नक्सली एवं माओवादी हमलों तथा पूर्वोत्तर राज्यों में जातीय और भाषाई कट्टरपंथियों के हमलों में 2300 से अधिक लोगों की जान चली गई।
रिपोर्ट में भारत सरकार के आतंकवाद से निपटने के प्रयासों की भी जानकारी दी गई है। जिसमें सरकार के रास्ते में पुराने और बोझिल कानून वाली न्यायिक प्रक्रिया को बड़ी बाधा बताया गया है।
रिपोर्ट के अनुसार भारत में अदालती प्रक्रिया सुस्त और लचर होने के कारण भ्रष्टाचार को प्रश्रय मिलता है और आतंकवाद से जुडे मामलों के फैसले आने में लंबा समय लग जाता है, साथ ही पुलिस महकमे में भी निष्क्रियता का बोलबाला और समुचित प्रशिक्षण का अभाव आतंकवादियों के लिए वरदान साबित होता है।
अमेरिका के इस अहम दस्तावेज में पाकिस्तान में दूरदराज के दुर्गम कबाइली इलाकों में अल कायदा के फिर से पनपने और फलने-फूलने से मौत का तांडव शुरू होने की आशंका जताई गई है। इसके अलावा ईरान को भी आतंकवाद का सर्वाधिक सक्रिय प्रायोजक बताया गया है। इसके प्रायोजक देशों की सूची में सीरिया, उत्तर कोरिया, सूडान और क्यूबा को भी शामिल किया गया है।
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