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बेकाल झील ग्लोबल वॉर्मिंग की चपेट में
इबेरिया इलाके में स्थित दुनिया की सबसे बड़ी बेकाल झील भी तेजी से ग्लोबल वॉर्मिंग की चपेट में आ रही है और इस कारण से झील का तापमान बढ़ने से इसमें पाए जाने वाली जैविक प्रजातियाँ संकट की स्थिति में आ गई हैं।

अमेरिका और रूस के वैज्ञानिकों ने यह चेतावनी जारी करते हुए बताया कि पिछले 60 सालों में इस झील के तापमान में 1.21 डिग्री सेल्सियस की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। वैज्ञानिकों द्वारा अगले माह जारी होने वाले शोधपत्र 'ग्लोबल चेंज बायोलॉजी' में कहा गया है कि बेकाल झील के तापमान में वृद्धि दर वैश्विक वायु तापमान की वृद्धि दर से तीन गुना ज्यादा है।

शोधपत्र तैयार करने वाले वैज्ञानिक दल के सदस्य मेरिन मूर ने एक साक्षात्कार में बताया कि साल के अधिकांश समय बर्फ से जमी रहने वाली साफ पानी की इस झील में जीव-जंतुओं की लगभग 2500 प्रजातियाँ पाई जाती हैं।

उन्होंने बताया कि इनमें से अधिकांश प्रजातियाँ सिर्फ इसी झील में मिलती हैं। डॉ मूर ने बताया कि धरती पर साफ पानी का 20 प्रतिशत हिस्सा अपने आगोश में समेटे बेकाल झील के जीव-जंतुओं के समक्ष अब आवास का संकट उत्पन्न हो रहा है। इसका प्रमुख कारण इसके जीव-जंतुओं के सामने मौसम चक्र में बदलाव के फलस्वरूप इनके भोजन चक्र में आने वाला बदलाव है।
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