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तिब्बत में 30 लोगों को कड़ी सजा
चीन की सरकार ने तिब्बत की राजधानी ल्हासा में सरकार विरोधी प्रदर्शनों के सिलसिले में छह बौद्ध भिक्षुओं सहित 30 लोगों को मंगलवार को जेल की सजा सुनाई।

सरकार विरोधी प्रदर्शनों के कथित दोषियों को तीन वर्ष से लेकर उम्रकैद तक की सजा सुनाई गई है। चीन की सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ के मुताबिक तिब्बत की राजधानी ल्हासा स्थित अंतर मध्यस्थ जन अदालत की खुली कार्रवाई में मंगलवार को तीन लोगों को उम्रकैद की सजा सुनाई गई। उन पर आरोप है कि वे 14 मार्च को ल्हासा में भड़के दंगों में सक्रिय रूप से शामिल थे। इसमें 20 लोग मारे गए थे और 1000 लोग घायल हो गए थे। सुरक्षा बलों ने प्रदर्शनकारियों का जबरदस्त दमन किया था।

शिन्हुआ के अनुसार बसांग नामक एक भिक्षु को उम्रकैद की सजा दी गई है। उस पर पाँच भिक्षुओं सहित दस लोगों के साथ सरकारी कार्यालय को क्षति पहुँचाने और ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों पर हमला करने का आरोप है।

बसांग का साथ देने वाले पाँच भिक्षुओं में से दो को 20-20 वर्ष के कारावास की सजा दी गई है, जबकि शेष भिक्षुओं को 15 साल के लिए सलाखों के पीछे भेज दिया गया है।

समाचार समिति शिन्हुआ ने अदालत की विज्ञप्ति के हवाले से कहा है कि एक रियल स्टेट फर्म के सोईनाम नोरबू नामक ड्राइवर को भी आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई। नोरबू पर आरोप है कि वह जोखंग मठ के समीप वाहन जलाने वाली उस भीड़ में शामिल था, जिसने पुलिस स्टेशनों पर पथराव किया।

उल्लेखनीय है कि तिब्बत की राजधानी ल्हासा और दूसरे हिस्सों में सरकार विरोधी दंगे भड़कने के बाद चीन ने भारी मात्रा में सैनिकों को तैनात कर दिया था। चीन ने इन दंगों के लिए दलाई लामा को दोषी ठहराया था, लेकिन दलाई लामा ने हिंसा की आलोचना करते हुए चीन के आरोपों का खंडन कर दिया था।

अदालत के फैसले के बारे में पूछे जाने चीन के विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता जियांग यू ने कहा कि चीन की सरकार ने इस मामले को कानून के मुताबिक निपटाया है। उन्होंने कहा कि जो कानून तोड़ेगा उन्हें कानून के अनुसार दंडित किया जाएगा। मुझे लगता है कि सारी दुनिया में ऐसा ही होता है।
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