लंदन में इस सप्ताह होने वाले मेयर के चुनाव में मुसलमानों के मत खासे अहम बन गए हैं। शहर में इस्लामी कट्टरपंथियों के 2005 में आत्मघाती हमले के बाद से पहली बार उम्मीद है कि बड़ी सँख्या में मुस्लिम मतदाता अपने मताधिकार का इस्तेमाल करेंगे।
गुरुवार को होने वाले चुनाव में वामपंथी केन लिविंगस्टोन के खिलाफ मुख्य विपक्षी कन्जर्वेटिव पार्टी के बोरिस जॉनसन हैं। लिविंगस्टोन दोबारा जीत के लिए चुनाव लड़ रहे हैं और उन्हें प्रमुख मुस्लिम गुटों का समर्थन हासिल है।
इराक युद्व के खिलाफ अपने दृष्टिकोण के कारण लिविंगस्टोन इससे पहले मुस्लिम मतों को झटकने में कामयाब रहे थे। दूसरी ओर जॉनसन ने लंदन पर हमले के चलते 'इस्लाम इज द प्रॉब्लम' लिखकर तथा आव्रजन के बारे में चिंता जताकर मुस्लिमों को नाराज कर दिया था। अब उन्हें अपना बचाव करना होगा। लंदन पर हमले में 52 व्यक्ति मारे गए थे।
लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स के टोनी ट्रेवर्स का कहना है सभी आँकड़ें बताते हैं कि लिविंग्सटोन को अधिक अल्पसँख्यक मत मिलेंगे, लेकिन इस मामले में लेबर पार्टी का पक्ष कमजोर होता जा रहा है। दोनों पार्टियों के प्रचार में लगे कार्यकर्ता पिछली जुमे की नमाज के बाद उत्तर पश्चिमी लंदन के हैरो मस्जिद में मतदाताओं को इश्तहार बाँटने में लग गए गए हैं।
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