क्यूबा के पूर्व राष्ट्रपति फिदेल कास्त्रो ने एक साल पहले ही दुनिया को चेतावनी दे दी थी कि अमेरिका अनाज की कीमतों में कृत्रिम तेजी ला रहा है और इससे वैश्विक स्तर पर अकाल भी पड़ सकता है।
करिश्माई नेता कास्त्रो ने अपने घोर विरोधी राष्ट्र अमेरिका की तेल नीति की आलोचना करते हुए अपने कॉलम में लिखा था कि वह खाद्य पदार्थो के दामों में तेजी लाने की कोशिश कर रहा है। इसका प्रभाव यह पडे़गा कि विश्व में कई जगह अकाल जैसी स्थितियाँ पैदा हो जाएगी। लगभग तीन अरब लोग भूख और प्यास से दम तोड़ देंगे।
कास्त्रो के मुताबिक यह कोई कोरी तुक्केबाजी नही है। इन आँकड़ों के मजबूत आधार हैं। कम्युनिस्ट नेता कास्त्रों ने कहा था कि बुश प्रशासन और अमेरिकी वाहन उद्योग का यह पापी विचार है कि अनाज की फसलों की जगह तेल का उत्पादन वाली खेती को बढ़ावा दिया जाए।
पिछले दिनों अनाज को लेकर कुछ देशों में भड़के दंगे इस बात की गवाही देते से लगते हैं कि कास्त्रो वाकई अंधेरे में तीर नहीं मार रहे थे। दंगे की मार की चपेट में हैती जैसे गरीब मुल्क के अलावा कैमरून, मिस्त्र और इंडोनेशिया भी आ गए हैं। कुछ देशों ने अनाज का निर्यात पूरी तरह से बंद कर दिया है।
संयुक्त राष्ट्र की संस्था खाद्य और कृषि संगठन (एफएओ) की रिपोर्ट के मुताबिक विश्व भर में लगभग 37 मुल्क अनाज की कमी का संकट झेल रहें हैं। यूएन के महासचिव बान की मून ने पिछले सप्ताह ही आगाह किया था कि खाद्य पदार्थो के बढ़ते दामों ने विश्व स्तर पर एक नया संकट पैदा किया है।
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