भारतीय कैदी सरबजीतसिंह की फाँसी आज एक बार फिर तीन सप्तान तक टल गई। यह घटनाक्रम उन्हें फाँसी दिए जाने से ठीक दो दिन पहले हुआ है।
अधिकारियों ने कहा कि पंजाब प्रांत के गृह मंत्रालय की ओर से सरबजीत की फाँसी पर प्रक्रियात्मक स्थगन है। लाहौर और मुल्तान में 1990 में हुए चार बम धमाकों में कथित तौर पर संलिप्त रहने के लिए सरबजीत को फाँसी की सजा सुनाई गई थी।
राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ ने गत मार्च में सरबजीत की फाँसी की सजा पर क्रियान्वयन पर 30 दिनों के लिए रोक लगा दी थी। इस मियाद के खत्म होने के बाद उसे एक मई को फाँसी दी जानी थी। इन नियमों के तहत फाँसी की नई तारीख 14 दिन की अवधि के पहले या 21 दिन के बाद नहीं निर्धारित की जा सकती।
अधिकारियों ने कहा कि इसका मतलब है कि फाँसी तीन हफ्ते तक टल गई है। उन्होंने कहा कि फैसला प्रक्रियात्मक मामला था। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता मोहम्मद सादिक और राष्ट्रपति के प्रवक्ता मेजर जनरल (सेवानिवृत्त) राशिद कुरैशी ने कहा कि इस घटनाक्रम पर वे कुछ नहीं कह सकते।
कुरैशी ने एक बार फिर कहा कि सरबजीत का मामला राष्ट्रपति के पास लंबित नहीं है। राष्ट्रपति इस मामले में प्रधानमंत्री सचिवालय की सिफारिशों पर कार्रवाई करेंगे। सरबजीत की बहन दलबीर कौर ने कहा कि परिवार सजा टलने की बात सुनकर खुश है। गौरतलब है कि सरबजीत की बहन दलबीर कौर उनकी पत्नी सुखप्रीत कौर उनकी बेटियाँ स्वप्नदीप और पूनम तथा उनके बहनोई लाहौर में ही हैं।
कोट लखपत जेल के उपाधीक्षक बशीर खान ने कहा कि भारतीय कैदी को निर्धारित तारीख को फाँसी नहीं दी जाएगी। एक भारतीय टेलीविजन चैनल से उन्होंने कहा कि फाँसी की नई तारीख के बारे में एक मई को सत्र न्यायाधीश को पत्र लिखा जाएगा।
दलबीर ने कहा कि वह वीजा अवधि बढ़ाने के संबंध में परिवार की ओर से किए गए अनुरोध पर पाकिस्तानी अधिकारियों का जवाब आने का इंतजार कर रही हैं। परिवार को एक हफ्ते के लिए जारी वीजा अवधि कल समाप्त हो रही है।
उन्होंने कहा कि अगर वीजा अवधि नहीं बढ़ाई जाती है तो कल हम भारत रवाना हो जाएँगे। सूत्रों ने कहा कि सरबजीत के परिवार को सलाह दी गई है कि वे शीर्ष पाकिस्तानी नेताओं से नहीं मिलें। उन्होंने कहा कि सरबजीत के परिवार और शीर्ष नेताओं के बीच मुलाकात को मीडिया में कवरेज मिलेगा और जमात उद दावा जैसे चरमपंथी समूहों को इस तरह का विरोध प्रदर्शन करने का और अवसर मिल जाएगा तथा सरबजीत को माफी नहीं देने के लिए पाकिस्तान सरकार पर दबाव पड़ेगा।
सरबजीत को पहले एक अप्रैल को फांसी दी जानी थी, लेकिन राष्ट्रपति मुशर्रफ ने फाँसी 30 दिनों के लिए इसलिए टाल दी थी ताकि भारत सरकार की ओर से सरबजीत को क्षमादान किए जाने के संबंध में की गई अपील पर नई सरकार समीक्षा कर सके।
इससे पहले पूर्व मानवाधिकार मंत्री अंसार बर्नी ने कहा कि उन्होंने मुशर्रफ और प्रधानमंत्री यूसुफ रजा गिलानी को तीसरी बार स्मरण-पत्र भेजा। उन्होंने उम्मीद जताई कि अगले कुछ दिनों के भीतर खुशखबरी मिलेगी। बर्नी सरबजीत को क्षमादान करने के लिए याचिका सौंप चुके हैं।
नवाज शरीफ ने बचाव किया : पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने आज सरकार से कहा कि वह मानवीय आधार पर सरबजीत को मृत्युदंड नहीं दे। शरीफ के बयान से भारतीय नागरिक सरबजीत को फाँसी की सजा से बचाए जाने की मुहिम को बल मिला है।
पीएमएलएन के प्रमुख ने हालाँकि सरबजीत को बिना शर्त माफी दिए जाने का समर्थन नहीं किया। शरीफ की पार्टी सत्तारूढ़ गठबंधन में महत्वपूर्ण घटक है। समाचार चैनलों ने शरीफ के हवाले से कहा है कि सरबजीत को इस शर्त पर रिहा किया जाना चाहिए कि अगर उसके खिलाफ ठोस सबूत मिलते हैं, तो उसे पाकिस्तान वापस भेज दिया जाएगा।
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