पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के सहअध्यक्ष आसिफ अली जरदारी और पाकिस्तान मुस्लिम लीग (एन) के अध्यक्ष नवाज शरीफ ने संविधान में संशोधन कर राष्ट्रपति के अधिकारों में कटौती करने का फैसला किया है।
स्थानीय दैनिक 'द न्यूज' ने खबर दी कि आगामी संविधान संशोधन में पाकिस्तान में पूरा शक्ति संतुलन बदल जाएगा और राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ के पास त्यागपत्र देने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचेगा, क्योंकि वे नाममात्र के राष्ट्रपति रह जाएँगे।
समाचार-पत्र ने सूत्रों के हवाले से कहा है कि संविधान संशोधन के वास्तविक निशाने पर मुख्य न्यायाधीश नहीं, बल्कि राष्ट्रपति होंगे।
शुरू में नवाज शरीफ का मानना था कि मुशर्रफ पर देशद्रोह का मुकदमा चलाया जाए, लेकिन आसिफ अली जरदारी ने इससे असहमति जताई।
जरदारी ने सुझाव दिया कि किसी व्यक्ति विशेष को निशाना बनाने के स्थान पर राष्ट्रपति के अधिकारों को निशाना बनाया जाना चाहिए, जिनका उपयोग पाकिस्तान में लोकतंत्र को कमजोर करने में किया जा रहा था।
उन्होने पूर्व प्रधानमंत्री शरीफ से कहा कि सेना के उच्च अधिकारियों की नकारात्मक प्रतिक्रिया होगी, यदि उनके पूर्व सेनाध्यक्ष का किसी प्रकार से अपमान किया गया।
जरदारी ने शरीफ को भरोसा दिलाया कि वह 9 मार्च के मरी घोषणा पत्र को लागू करने के लिये वचनबद्ध हैं, जिसमें दोनों नेताओं ने वादा किया था कि नई सरकार बनने के 30 दिनों के अन्दर बर्खास्त न्यायाधीश की बहाली कर दी जाएगी।
पीएमएल (एन) के प्रमुख का कहना था कि 30 दिन की अवधि 30 अप्रैल को समाप्त हो रही है।
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