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सरबजीत के खिलाफ लाहौर में प्रदर्शन
अंसार बर्नी को भारतीय एजेंट बताया
सरबजीतसिंह को क्षमादान दिए जाने के संबंध में उनके परिजनों और मानवाधिकार समूह की ओर से अपील किए जाने के बीच यहाँ सैकड़ों छात्रों ने प्रदर्शन किया और उन्होंने भारतीय कैदी को माफी नहीं देने की माँग की।

छात्रों ने शुक्रवार को मार्च निकाला और सरबजीत को माफी देने के संबंध में उठाए जा रहे सभी आधिकारिक कदमों को वापस लेने की माँग की।

सरबजीत को 1990 में पंजाब प्रांत में हुए बम धमाकों में कथित तौर पर शामिल रहने के लिए मौत की सजा सुनाई गई थी। प्रदर्शनकारी छात्रों ने यह भी कहा कि सरबजीत को हीरो नहीं बनाया जाना चाहिए।

दैनिक द न्यूज ने आज बताया कि प्रदर्शनकारियों ने पाकिस्तान के पूर्व मानवाधिकार मंत्री अंसार बर्नी को भारतीय एजेंट करार दिया। छात्रों ने कहा कि अगर सरबजीत को रिहा किया जाता है तो वे सरकार के खिलाफ संयुक्त आंदोलन शुरू करेंगे।

तुलाबा जमातुद दावा के प्रमुख मुजम्मिल इकबाल हाशमी ने लाहौर प्रेस क्लब के बाहर संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए ये माँग की। छात्रों ने डच सांसद द्वारा कुरान के खिलाफ बनाई गई फिल्म के खिलाफ भी प्रदर्शन किया।

प्रदर्शनकारियों ने माँग की कि बर्नी को गिरफ्तार किया जाना चाहिए और उन पर राजद्रोह का मुकदमा चलाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि सरबजीत की रिहाई से पूरा देश अपमानित होगा।

हाथों में बैनर और प्लेकार्ड लिए छात्रों ने नारेबाजी की और सड़क जाम की। नेताओं ने पश्चिमी उत्पादों और संस्कृति का बहिष्कार करने और इस्लाम की शिक्षाओं को बढ़ावा देने की माँग की। गौरतलब है कि राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ ने सरबजीत की फाँसी 30 दिनों के लिए टाल दी थी।
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