पाकिस्तान के प्रधानमंत्री यूसुफ रजा गिलानी ने कहा है कि उनकी सरकार को पाक राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ से कोई समस्या नहीं होगी।
ऐसा कहकर उन्होंने यह संकेत दिया है कि वह पूर्व सैन्य शासक के साथ मिलकर काम करना चाहते हैं। गिलानी ने यह भी कहा कि वह नहीं मानते कि संसद को भंग करने या प्रधानमंत्री को बर्खास्त करने के लिए मुशर्रफ का राष्ट्रपति की विवादास्पद शक्तियों का इस्तेमाल करने का कोई इरादा है।
नवाए वक्त ग्रुप के साथ साक्षात्कार में उन्होंने कहा मुशर्रफ आठ साल से राष्ट्रपति रहे हैं। उन्होंने स्वेच्छा से अपनी वर्दी उतारी है और हाल ही में उन्होंने चुनाव कराए हैं और लोकतंत्र समर्थक शक्तियों को सत्ता में लेकर आए हैं। मुझे नहीं लगता कि हमें उनसे कोई परेशानी होगी।
वे उस सवाल का जवाब दे रहे थे, जिसमें उनसे पूछा गया था कि यदि पिछले साल आपातकाल के दौरान बर्खास्त किए गए न्यायाधीशों को बहाल किया जाता है तो क्या मुशर्रफ द्वारा संसद को भंग करने के लिए संविधान की विवादास्पद धारा 58 (2-बी) के तहत अपनी शक्तियों का इस्तेमाल किए जाने की आशंका है।
गिलानी ने कहा हम नहीं मानते कि राष्ट्रपति का इस धारा को इस्तेमाल करने का कोई इरादा है। लोगों ने हमें संविधान की बहाली के अपना जनादेश दिया है। हम उसका सम्मान करेंगे और ऐसा ही राष्ट्रपति करते हैं।
एक ओर पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) ने संकेत दिया है कि वह मुशर्रफ के साथ कामकाजी संबंध रखने की इच्छा रखती है, वहीं दूसरी ओर पाकिस्तान मुस्लिम लीग नवाज गुट (पीएमएलएन) के प्रमुख नवाज शरीफ इस पर कायम हैं कि मुशर्रफ को राष्ट्रपति पद छोड़ देना चाहिए।
यह पूछे जाने पर कि क्या पीपीपी के सह-अध्यक्ष आसिफ अली जरदारी जून में उपचुनाव लड़ने के बाद पाकिस्तान के प्रधानमंत्री बनेंगे, गिलानी ने सीधा जवाब देने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि जरदारी को चुनाव लड़ने का पूरा अधिकार है। जहाँ तक मेरे कार्यालय का सवाल है, मैं पार्टी द्वारा प्रधानमंत्री बनाया गया था और मैं पार्टी के अनुरूप ही चलूँगा। अफगानिस्तान की सीमा से लगते पाकिस्तान के कबाइली इलाकों में आतंकवादी समूहों के साथ शांति समझौते के बारे में उन्होंने कहा हमारी सरकार की कबाइली इलाकों के लिए आर्थिक उत्थान विकास और अंतिम विकल्प के रूप में ताकत के इस्तेमाल जैसी त्रिस्तरीय नीति है।
गिलानी ने कहा हमें संघ शासित कबाइली क्षेत्रों की आर्थिक स्थिति सुधारने की जरूरत है। हमें वहां सामाजिक उत्थान करने की भी जरूरत है। ताकत का इस्तेमाल सिर्फ तभी किया जाएगा, जब कोई और विकल्प नहीं बचेगा।
गिलानी ने हाल ही में आए अमेरिका के विदेश उपमंत्री रिचर्ड बाउचर के बयानों से सहमति जताई। बाउचर ने अपने बयानों में कहा था कि कबाइली क्षेत्रों में पूर्व में किए गए शांति समझौते प्रभावी नहीं रहे।
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