चीन सरकार की तिब्बत के अध्यात्मिक नेता दलाई लामा के प्रतिनिधियों के साथ बातचीत करने के बयान के बाद भी चीनी मीडिया के सुर नरम नहीं हुए हैं।
चीन की सरकारी समाचार एजेंसी 'शिन्हुआ' की एक रिपोर्ट के अनुसार चीन सरकार के इस कदम के बाद तिब्बत में चीन विरोधी प्रदर्शन पूरी तरह बंद हो सकते हैं लेकिन दलाई लामा को फिर समझ लेना चाहिए कि तिब्बत चीन का हिस्सा है।
हालाँकि सरकारी नियंत्रण वाले अंग्रेजी अखबार अब भी तिब्बत में हिंसा के लिए दलाई लामा को जिम्मेदार मानते हैं। कम्युनिस्ट पार्टी के मुखपत्र पीपुल्स डेली में लिखा गया है कि दलाई लामा द्वारा प्रयोजित हिंसा बौद्ध धर्म के मूल्यों के खिलाफ है और इससे चीन की छवि को नुकसान पहुँचा है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि दलाई लामा तिब्बत की शांति और स्थायित्व के लिए खतरा है। इससे पहले चीन सरकार ने कहा था कि वह दलाई लामा के प्रतिनिधियों के साथ बातचीत करने के लिए तैयार है। तिब्बत की निर्वासित सरकार के बयान में कहा गया था कि दलाई लामा ने 19 मार्च को चीन के प्रधानमंत्री हू जिंताओ को एक पत्र लिखकर बातचीत की पेशकश की थी। जानकारों का कहना है कि चीन का बातचीत करना और मृतकों को मुआवजा देना उसकी रणनीति का हिस्सा है।
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