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ग्लोबल वार्मिंग से निबटना होगा खतरनाक
ग्लोबल वार्मिंग के दुष्प्रभावों को रोकने के लिए पृथ्वी के समताप मंडल में सल्फेट के छिड़काव के सुझाव समाधान की बजाय एक और बड़ा संकट खड़ा कर सकते हैं।

पर्यावरण वैज्ञानिकों के ताजा अनुसंधान के मुताबिक पृथ्वी को ठंडा रखने के लिए इसके समताप मंडल में सूर्य की रोशनी के प्रवेश को कम करने के यह कृत्रिम उपाय दक्षिणी ध्रुव में अंटार्कटिक क्षेत्र के उपर बने ओजोन छिद्र की स्वत: मरम्मत की रफ्तार को 30 से 50 वर्ष और धीमा कर देंगे।

अमेरिका के कोलोराडो के नेशनल सेंटर फॉर एटमोसफियरिक रिसर्च की वैज्ञानिक सिनोमे टिलमेस के मुताबिक ताजा अध्ययन के नतीजे बताते हैं कि अगर समताप मंडल में ज्यादा मात्रा में सल्फेट छिड़का गया तो इससे ओजोन परत को भारी नुकसान पहूँचेगा। हाल के दिनों मे कई पर्यावरण वैज्ञानिकों ने यह सुझाव दिया था कि ग्लोबल वार्मिंग को कम करने के लिए यह उपाय काफी कारगर हो सकते हैं।

टिलमेस का मानना है कि वैज्ञानिकों के दिमाग का यह फंडा शायद ज्वालामुखियों के विस्फोटों से समताप मंडल में बड़ी मात्रा में सल्फेट के पहुँचने से उसके तत्काल प्रभाव से धरती का तापमान कम हो जाने की घटनाओं से जुड़ा है।

टिलमेस का कहना है कि सल्फेट के छिड़काव का उल्टा प्रभाव यह होगा कि यह ध्रुवीय क्षेत्रों की ठंडी क्लोरीन गैसों के साथ मिलकर ऐसी रासायनिक प्रक्रिया कों अंजाम देगा, जिससे वहाँ पहले से ही पतली होती जा रही ओजोन परत और ज्यादा नष्ट होने लगेगी।
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